बक्सर, 13 दिसंबर 2025: कानून का दुरुपयोग करने वालों को अब कोई छूट नहीं मिलेगी। जिले की पॉक्सो अदालत ने एक झूठे यौन शोषण के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए सूचक और पीड़िता की मां के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश-6 सह पॉक्सो विशेष न्यायाधीश अमित कुमार शर्मा की अदालत ने कहा कि मनगढ़ंत मुकदमे न्याय व्यवस्था को कमजोर करते हैं, और ऐसे अपराधियों को बख्शा नहीं जाएगा। यह फैसला न केवल निर्दोषों को राहत देगा, बल्कि झूठे केसों की बढ़ती प्रवृत्ति पर भी लगाम लगाएगा। स्थानीय लोग इसे न्याय की जीत मान रहे हैं, जहां एक परिवार का बदला लेने का प्रयास उल्टा पड़ गया।

यह मामला सिकरौल थाना क्षेत्र के अनंत चौधरी (जिन्हें अंटू चौधरी भी कहा जाता है) से जुड़ा है। 15 मार्च 2025 को पीड़िता (एक नाबालिग लड़की) के साथ कथित बलात्कार का आरोप लगाया गया था। सूचना के मुताबिक, लड़की शौच के लिए जा रही थी जब अंटू चौधरी और उनके साथियों ने कट्टा और पिस्तौल दिखाकर अपराध किया। चीख सुनकर परिवार के लोग पहुंचे, तो आरोपी भाग गए। इसके आधार पर 28 मार्च 2025 को महिला थाने में पॉक्सो एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज हुई। लेकिन जांच आगे बढ़ी तो सच्चाई सामने आई। पुलिस ने 13 अगस्त 2025 को अंतिम रिपोर्ट सौंपते हुए मामले को झूठा घोषित कर दिया।

अदालत ने सबूतों की गहन जांच की। पीड़िता का बयान बार-बार बदलता रहा। वह कपड़ों की फॉरेंसिक रिपोर्ट और आंतरिक मेडिकल जांच के बारे में कोई जानकारी देने से इनकार कर दी। आरोपी और गवाहों के मोबाइल लोकेशन भी घटनास्थल से मेल नहीं खाते थे। अदालत ने पाया कि यह सब जानबूझकर रचा गया नाटक था। पॉक्सो एक्ट का दुरुपयोग कर निर्दोष को फंसाने की कोशिश की गई। वास्तव में, पीड़िता की मां अवैध शराब के कारोबार में लिप्त थी और जेल जा चुकी थी। परिवार का मानना था कि अंटू चौधरी ने ही पुलिस को इसकी सूचना दी थी। बदला लेने के लिए नाबालिग को हथियार बनाकर झूठा केस ठोंका गया। अदालत ने इसे कानून की खिल्ली उड़ाने वाला बताया।
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जज अमित कुमार शर्मा ने फैसले में साफ कहा, “गलत और मनगढ़ंत मुकदमे से आपराधिक न्याय व्यवस्था पर बुरा असर पड़ता है। नाबालिग को हथियार बनाकर गंभीर आरोप लगाना अक्षम्य है।” अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया कि सूचक और पीड़िता की मां के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज करें। कार्रवाई कानून के अनुसार हो, जिसमें झूठी शिकायत के लिए सजा का प्रावधान है। यह आदेश पॉक्सो एक्ट की धारा 22 के तहत दुरुपयोग रोकने का उदाहरण बनेगा। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में अब अदालतें सख्त हो रही हैं। हाल ही में कई केसों में सूचकों पर ही उल्टा मुकदमा चला है।

यह फैसला बक्सर जैसे जिले के लिए एक सबक है। जहां परिवारिक झगड़े या पुरानी दुश्मनी के नाम पर कानून का सहारा लिया जाता है। निर्दोष अंटू चौधरी ने राहत मिलने पर कहा, “महीनों की त्रासदी अब समाप्त हुई। लेकिन झूठे केस का दर्द आसानी से नहीं भूलता।” उनके परिवार ने अदालत का आभार जताया। दूसरी ओर, पीड़िता की मां पर अब कानूनी शिकंजा कस रहा है। स्थानीय लोग उम्मीद कर रहे हैं कि इससे झूठे आरोपों की संख्या कम होगी। महिला थाने और सिकरौल थाने की पुलिस ने आदेश का पालन करने की तैयारी शुरू कर दी है।
पॉक्सो एक्ट बच्चों की सुरक्षा के लिए बना है, लेकिन इसका दुरुपयोग समाज को तोड़ता है। अदालत का यह कदम न केवल न्याय सुनिश्चित करेगा, बल्कि भविष्य में सावधानी बरतने की सीख देगा। बक्सर में कानूनी जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है, ताकि लोग जानें कि झूठ का सहारा लेना महंगा पड़ सकता है। यह घटना पूरे बिहार के लिए एक मिसाल बनेगी, जहां सच्चाई की जीत हुई है।
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