Ahiyapur Murder Case: बुलडोजर चला, लेकिन प्रशासनिक देरी पर उठे कई गंभीर सवाल

Ahiyapur Murder Case
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बिहार के बक्सर जिले के अहियापुर गांव में 24 मई 2025 को हुए बक्सर तिहरे हत्याकांड (Ahiyapur Murder Case) के बाद प्रशासन ने 28 मई 2025 को आरोपियों की संपत्तियों पर कुर्की-जब्ती और बुलडोजर कार्रवाई शुरू की। इस हाई-प्रोफाइल ऑपरेशन में 6 बुलडोजर, 8 ट्रैक्टर, और भारी पुलिस बल की तैनाती की गई, लेकिन देर शाम शुरू हुई कार्रवाई ने प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए। ग्रामीणों ने कार्रवाई को सराहनीय बताया, लेकिन समय पर न होने के कारण इसके प्रभाव पर चिंता जताई।

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24 मई 2025 को अहियापुर गांव में अवैध बालू खनन के विवाद में हुई गोलीबारी में सुनील सिंह, विनोद सिंह, और वीरेंद्र सिंह की हत्या हुई, जबकि पूजन सिंह और मंटू सिंह गंभीर रूप से घायल हुए। प्राथमिकी में 19 लोगों को नामजद किया गया, जिनमें पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधि मनोज यादव और पूर्व उपाध्यक्ष संतोष यादव शामिल हैं। अब तक केवल ओम प्रकाश सिंह को गिरफ्तार किया गया है, जबकि मुख्य आरोपी फरार हैं।

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कुर्की-जब्ती और बुलडोजर कार्रवाई

28 मई 2025 को, न्यायालय से कुर्की वारंट प्राप्त होने के बाद, जिलाधिकारी अंशुल अग्रवाल के निर्देश पर राजपुर प्रखंड विकास पदाधिकारी सिद्धार्थ कुमार और अंचलाधिकारी शोभा कुमारी ने बुलडोजर कार्रवाई शुरू की। अनुमंडल पदाधिकारी अविनाश कुमार के नेतृत्व में 6 बुलडोजर और 8 ट्रैक्टरों के साथ भारी पुलिस बल तैनात किया गया। अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी धीरज कुमार और थानाध्यक्ष ज्ञान प्रकाश सिंह ने सुरक्षा व्यवस्था संभाली। कार्रवाई में आरोपियों के घरों से पालतू मवेशियों को सुरक्षित निकाला गया, फिर दरवाजे और खिड़कियां उखाड़ी गईं। इस कार्रवाई ने गांव में दहशत का माहौल पैदा कर दिया।

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“आरोपियों की संपत्तियों पर कुर्की-जब्ती शुरू हो चुकी है। यह कार्रवाई आगे भी सख्ती से जारी रहेगी।”

— अंशुल अग्रवाल, जिलाधिकारी, बक्सर

प्रशासनिक देरी और सवाल

हालांकि कार्रवाई प्रभावी थी, लेकिन इसकी शुरुआत में देरी ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए। जिलाधिकारी ने सुबह कार्रवाई शुरू करने का आदेश दिया था, लेकिन प्रखंड विकास पदाधिकारी और अंचलाधिकारी की देर से उपस्थिति के कारण यह शाम 6:30 बजे शुरू हुई। स्थानीय लोगों ने इस देरी को संदिग्ध बताया, कुछ ने इसे जानबूझकर ढिलाई का आरोप लगाया। क्या प्रशासन कुछ आरोपियों को बचाने की कोशिश कर रहा है। एसपी शुभम आर्य ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला, लेकिन अधिकारियों के अलग-अलग बहाने चर्चा का विषय बने।

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ग्रामीणों की प्रतिक्रिया

स्थानीय लोगों ने बुलडोजर कार्रवाई को सराहा, लेकिन समय पर न होने के कारण इसके प्रभाव को सीमित माना। एक ग्रामीण ने कहा, “यदि यह कार्रवाई सुबह शुरू होती, तो इसका डर अपराधियों में और बढ़ता।” कई ग्रामीणों ने मांग की कि मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी जल्द हो। ग्रामीणों ने पहले भी जलहरा बाजार में सड़क जाम कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। जनता ने प्रशासन की देरी को “लापरवाही” करार दिया।

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आगे की कार्रवाई और चुनौतियां

प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि कुर्की-जब्ती और बुलडोजर कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। एसपी शुभम आर्य ने आश्वासन दिया कि फरार आरोपियों को जल्द पकड़ा जाएगा। हालांकि, मुख्य आरोपी मनोज यादव और संतोष यादव की फरारी और कथित राजनीतिक संरक्षण ने जांच को जटिल बना दिया है। विशेष जांच दल (SIT) सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बयानों की जांच कर रहा है। वहा की जनता ने SIT के जांच अधिकारी पर भी सवाल उठाए, जिससे प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है।

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बक्सर तिहरे हत्याकांड के बाद अहियापुर में हुई बुलडोजर कार्रवाई ने प्रशासन की सख्ती तो दिखाई, लेकिन देरी ने इसके प्रभाव को कम कर दिया। 6 बुलडोजर और 8 ट्रैक्टरों के साथ की गई कुर्की-जब्ती ने अपराधियों में खौफ पैदा किया, लेकिन ग्रामीणों की नाराजगी से साफ है कि समयबद्ध कार्रवाई की कमी ने विश्वास को ठेस पहुंचाई। बक्सर में अपराध की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताई। मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी और बालू माफिया के खिलाफ ठोस कदम ही, इस क्षेत्र में शांति ला सकते हैं। प्रशासन को अब न केवल अपराधियों को पकड़ना होगा, बल्कि अपनी कार्यशैली में सुधार कर जनता का भरोसा भी जीतना होगा।

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