बक्सर। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2026 को लोकसभा में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश किया। यह बजट आर्थिक विकास को गति देने, बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और रोजगार सृजन पर केंद्रित है। कुल व्यय 53.5 लाख करोड़ रुपये अनुमानित है, जिसमें पूंजीगत व्यय को बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये किया गया है, जो सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 3.1 प्रतिशत है। राजकोषीय घाटा 4.3 प्रतिशत रखने का लक्ष्य रखा गया है, जो वित्तीय अनुशासन को दर्शाता है।

बजट में नाममात्र जीडीपी वृद्धि 10 प्रतिशत अनुमानित है। कर राजस्व में 8 प्रतिशत की वृद्धि का लक्ष्य है, जिसमें प्रत्यक्ष करों में 11.4 प्रतिशत और अप्रत्यक्ष करों में 3 प्रतिशत वृद्धि शामिल है। राज्यों को हस्तांतरण में 9.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। व्यय में राजस्व व्यय की वृद्धि 6.6 प्रतिशत रखी गई है।
बुनियादी ढांचे और विनिर्माण पर विशेष ध्यान दिया गया है। एमएसएमई विकास कोष के लिए 10,000 करोड़ रुपये का प्रावधान है, जो छोटे और मध्यम उद्यमों को मजबूत बनाएगा। स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिए सेमीकंडक्टर, बायोफार्मा, एआई और डीप-टेक जैसे क्षेत्रों पर जोर है। रक्षा मंत्रालय को 7.84 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिसमें पूंजीगत व्यय 2.19 लाख करोड़ रुपये है। टेलीकॉम क्षेत्र में ग्रामीण ब्रॉडबैंड और घरेलू हार्डवेयर को प्रोत्साहन दिया गया है।

कृषि क्षेत्र में भी कई कदम उठाए गए हैं, जिसमें जलवायु अनुकूल खेती और फसल विविधीकरण पर फोकस है। एमएसएमई और उभरते उद्यमों को स्केल करने के लिए विशेष उपाय हैं। बजट में आयकर दरों और स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है। सीमा शुल्क में कमी से समुद्री, चमड़ा और कपड़ा निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।
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युवा शक्ति पर आधारित इस बजट में कौशल विकास, रोजगार सृजन और उभरते क्षेत्रों पर जोर है। इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम का आवंटन 40,000 करोड़ रुपये किया गया है। रेयर अर्थ कॉरिडोर ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में विकसित किए जाएंगे। रेलवे के लिए 2.77 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान है, जिसमें सात पर्यावरण अनुकूल यात्री गलियारे और पूर्व-पश्चिम माल ढुलाई गलियारा शामिल हैं।
एफएमसीजी क्षेत्र को उपभोक्ता व्यय बढ़ाने से फायदा मिलेगा। ऑटोमोबाइल निर्यात में 24 प्रतिशत वृद्धि का उल्लेख करते हुए वैश्विक बाजार को मजबूत बनाने पर जोर है। बजट में वित्तीय समावेशन और डिजिटल बुनियादी ढांचे को भी प्राथमिकता दी गई है।

यह बजट दीर्घकालिक विकास, वित्तीय अनुशासन और जिम्मेदार शासन की दिशा में एक कदम है। विशेषज्ञों का कहना है कि पूंजीगत निवेश से आर्थिक ढांचा मजबूत होगा और आत्मनिर्भर भारत की नींव रखी जाएगी। हालांकि, अप्रत्यक्ष करों में कम वृद्धि से राजस्व दबाव की चिंता है। कुल मिलाकर, बजट विकास और स्थिरता के बीच संतुलन बनाने का प्रयास करता है।
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