उड़ीसा में किसान आंदोलन के शांतिपूर्ण समर्थन पर गिरफ्तारियां, सांसद सुधाकर सिंह ने कहा – लोकतंत्र पर सीधा आघात

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भुवनेश्वर/बक्सर: उड़ीसा के भुवनेश्वर में चल रहे किसान आंदोलन के शांतिपूर्ण समर्थन में शामिल होने पर सांसद सुधाकर सिंह समेत कई लोगों को उड़ीसा पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। आज आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुधाकर सिंह ने कहा कि यह कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा आघात है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसानों की आवाज को दबाना न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन भी है। देश का अन्नदाता अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहा है और उसे समर्थन देना कोई अपराध नहीं हो सकता।

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प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुधाकर सिंह ने बताया कि वे राकेश टिकैत जी और दिनेश जी समेत अन्य साथियों के साथ भुवनेश्वर पहुंचे थे। पूर्व से अनुमति ली जा चुकी थी। किसान शांतिपूर्वक अपनी 10 दिन की पदयात्रा पूरी कर रहे थे। लेकिन जब वे ट्रैक्टर से आगे बढ़ रहे थे तो बीच रास्ते में उड़ीसा पुलिस के हजारों बल ने बिना किसी नोटिस, वारंट या अनुमति के उन्हें कस्टडी में ले लिया। सुधाकर सिंह और दिनेश जी को पूरे विश्व सर्किट हाउस स्टेट गेस्ट हाउस में नजरबंद कर दिया गया।

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सुधाकर सिंह ने कहा कि उड़ीसा में किसान आंदोलन से जुड़े सारे नेता या तो भूमिगत हो गए हैं या गिरफ्तार कर लिए गए हैं। हजारों लोगों को बसों में भरकर जंगलों में दूर-दराज के इलाकों में छोड़ दिया गया है। वहां वे भूखे-प्यासे हैं और विषम परिस्थिति में हैं। उन्होंने कहा कि उड़ीसा की लोकतांत्रिक इतिहास में यह अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति है।

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सुधाकर सिंह ने बताया कि किसान धान खरीद, लोन माफी, बिजली सुविधा और खेतों में पानी की मांग लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे थे। सरकार उनकी बात सुनने के लिए तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि गेस्ट हाउस में भोजन और पानी बंद कर दिया गया है। गैस सिलेंडर नहीं होने का बहाना बनाया जा रहा है। सांसद होने के नाते भी इस तरह का व्यवहार गैर-कानूनी है। उन्होंने कहा कि वे कल लोकसभा सत्र में इस मुद्दे को उठाएंगे।

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सुधाकर सिंह ने आगे कहा कि 30 और 31 मार्च का कार्यक्रम पहले से तय था। लेकिन पुलिस ने उन्हें और अन्य नेताओं को रोक लिया। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन दबाने की साजिश है। शांतिपूर्ण तरीके से चल रहे आंदोलन को इस तरह रोका जा रहा है। उन्होंने आश्वासन दिया कि किसानों के साथ खड़े रहेंगे। गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करेंगे। संयुक्त मोर्चा के साथ दिल्ली में भी कार्यक्रम बनाएंगे।

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उन्होंने कहा कि उड़ीसा पुलिस ने 13-14 बड़े नेताओं पर धाराएं लगाकर जेल भेज दिया है। यह आंदोलन को कुचलने की कोशिश है। सुधाकर सिंह ने कहा कि किसान आंदोलन को दबाया नहीं जा सकता। वे गांवों में जाएंगे, जिलों में मीटिंग करेंगे और जब तक नेता छूट नहीं जाते, आंदोलन जारी रहेगा।

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यह घटना उड़ीसा में चल रहे किसान आंदोलन को लेकर राजनीतिक हलचल बढ़ा रही है। सुधाकर सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार हर नागरिक को है। गिरफ्तारी के बावजूद वे किसानों के समर्थन में अपनी आवाज बुलंद रखेंगे।

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