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दारोगा की शर्मनाक करतूत: नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता को भेजे अश्लील मैसेज, एसपी ने शुरू की जांच

minor rape victim
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उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक दारोगा पर नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता को अश्लील मैसेज भेजने और अनुचित व्यवहार करने का गंभीर आरोप लगा है। पीड़िता की मां ने पुलिस अधीक्षक (एसपी) को शिकायत पत्र सौंपकर कार्रवाई की मांग की है। इस मामले ने पुलिस महकमे की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायत के बाद एसपी ने तत्काल जांच के आदेश दिए हैं, और इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच सीओ मिलक को सौंपी गई है। आइए इस घटना के हर पहलू को विस्तार से समझते हैं।

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रामपुर जिले के मिलक कोतवाली क्षेत्र में एक विधवा महिला ने अपनी नाबालिग बेटी के साथ हुई दुष्कर्म की घटना की शिकायत दर्ज कराने के लिए थाने का रुख किया था। महिला ने बताया कि उनकी बेटी के साथ दो सगे भाइयों ने दुष्कर्म किया था। जब स्थानीय थाने में उनकी शिकायत पर ध्यान नहीं दिया गया, तो उन्होंने इसकी शिकायत आईजीआरएस पोर्टल के जरिए दर्ज की।

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इसके बाद, शनिवार को एक दारोगा ने पीड़िता की मां को फोन कर कोतवाली बुलाया। रविवार को मां अपनी बेटी के साथ कोतवाली पहुंची, जहां दारोगा ने जांच के बहाने नाबालिग लड़की का मोबाइल नंबर ले लिया। महिला का आरोप है कि उसी रात दारोगा ने उनकी बेटी के व्हाट्सएप पर वीडियो कॉल की और अश्लील बातें शुरू कर दीं। दारोगा ने कथित तौर पर कहा, “एक बार अकेले में मेरे साथ चलना होगा, सब कुछ सही कर दूंगा।” जब लड़की ने कॉल काट दी, तो दारोगा ने बार-बार व्हाट्सएप कॉल और अश्लील मैसेज भेजे, जिसमें शारीरिक संबंध बनाने का दबाव डाला गया।

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कोतवाली में अश्लील व्यवहार

महिला ने बताया कि जब उनकी बेटी ने इस घटना की जानकारी उन्हें दी, तो वह उसे लेकर दोबारा कोतवाली गई। लेकिन वहां भी दारोगा ने उनकी बेटी के सामने अश्लील बातें कीं और धमकी दी कि “जब तक मुझे खुश नहीं करोगे, तब तक तुम्हारा मुकदमा नहीं लिखा जाएगा।” विरोध करने पर दारोगा ने मां-बेटी को डांटकर भगा दिया। इस व्यवहार से आहत होकर महिला ने व्हाट्सएप चैट के स्क्रीनशॉट्स को सबूत के तौर पर इकट्ठा किया और पुलिस अधीक्षक को शिकायत पत्र सौंपा।

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पुलिस अधीक्षक की कार्रवाई

महिला की शिकायत के बाद रामपुर के पुलिस अधीक्षक ने मामले को गंभीरता से लिया और तत्काल जांच के आदेश दिए। उन्होंने सीओ मिलक आरएस परिहार को इस प्रकरण की विस्तृत जांच करने और जल्द से जल्द रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। इस मामले ने न केवल पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं, बल्कि पीड़िताओं के प्रति संवेदनशीलता की कमी को भी उजागर किया है।

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पीड़िता की मां का दर्द

महिला ने अपने शिकायत पत्र में बताया कि उनकी नाबालिग बेटी पहले ही दुष्कर्म जैसी भयावह घटना से गुजर चुकी है। ऐसे में पुलिस से मदद की उम्मीद लेकर थाने पहुंचने के बावजूद, दारोगा के इस व्यवहार ने उनकी बेटी को और मानसिक आघात पहुंचाया। महिला ने कहा कि उनकी बेटी अब डर और तनाव में है, और इस घटना ने उनके परिवार के लिए न्याय की उम्मीद को और मुश्किल बना दिया है।

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पुलिस महकमे पर सवाल

यह मामला पुलिस विभाग की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाता है। दुष्कर्म जैसे संवेदनशील मामलों में पीड़िताओं को न्याय दिलाने की जिम्मेदारी पुलिस की होती है, लेकिन जब जांच के लिए जिम्मेदार अधिकारी ही अनुचित व्यवहार करें, तो यह पूरे सिस्टम पर दाग लगाता है। इस घटना ने यह भी उजागर किया कि कई बार पीड़िताएं थाने में अपनी शिकायत दर्ज कराने से डरती हैं, क्योंकि उन्हें पुलिस पर भरोसा नहीं रहता।

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जांच का इंतजार

एसपी द्वारा शुरू की गई जांच से इस मामले में जल्द ही सच्चाई सामने आने की उम्मीद है। यदि दारोगा के खिलाफ आरोप सिद्ध होते हैं, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही, दुष्कर्म के मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए भी पुलिस दबिश दे रही है। इस मामले ने स्थानीय लोगों में आक्रोश पैदा कर दिया है, और लोग इस बात की मांग कर रहे हैं कि दोषियों को कड़ी सजा दी जाए।

समाज पर प्रभाव

यह घटना न केवल एक कानूनी मामला है, बल्कि यह समाज में पीड़िताओं के प्रति संवेदनशीलता और पुलिस की जवाबदेही के मुद्दे को भी सामने लाती है। नाबालिग पीड़िताओं के साथ इस तरह का व्यवहार न केवल उनके मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि समाज में न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास को भी कम करता है।

वीडियो देखें

रामपुर में दारोगा द्वारा नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता को अश्लील मैसेज भेजने का यह मामला पुलिस महकमे के लिए एक शर्मनाक घटना है। पीड़िता की मां की शिकायत और साहस ने इस मामले को सामने लाया, और अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त जांच पर टिकी हैं। यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हमारी पुलिस व्यवस्था पीड़िताओं के प्रति पर्याप्त संवेदनशील है? इस मामले का नतीजा न केवल पीड़िता के लिए न्याय सुनिश्चित करेगा, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए भी एक मिसाल कायम कर सकता है।


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