पटना, 6 दिसंबर 2025: जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और सांसद संजय झा ने शुक्रवार को एक ऐसा बयान दिया, जिसने बिहार की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार से राजनीति में आने और पार्टी जॉइन करने की अपील की। झा ने कहा कि पार्टी के लोग, शुभचिंतक और समर्थक सभी यही चाहते हैं। अब फैसला निशांत को ही लेना है कि वे कब पार्टी में काम शुरू करते हैं। यह बयान पटना एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान आया, जब निशांत भी मौजूद थे।
संजय झा से जब निशांत कुमार के जेडीयू जॉइन करने के बारे में सवाल पूछा गया, तो उन्होंने साफ कहा, “पार्टी के लोग, पार्टी के शुभचिंतक और पार्टी के समर्थक, सभी लोग चाहते हैं कि वे (निशांत कुमार) आकर पार्टी में काम करें। हम सब लोग चाहते हैं। अब फैसला उन्हीं को लेना है कि वे कब पार्टी में काम करते हैं।” झा का यह बयान निशांत की राजनीतिक एंट्री की अटकलों को हवा दे रहा है। हाल ही में बिहार विधानसभा चुनाव में जेडीयू की अच्छी सफलता के बाद पार्टी में निशांत को लाने की मांग तेज हो गई थी। लेकिन अब तक निशांत ने खुद को राजनीति से दूर ही रखा है।

नीतीश ने कभी निशांत को राजनीति में लाने की कोशिश नहीं की
निशांत कुमार के सक्रिय राजनीति में आने की चर्चा बिहार में अक्सर होती रहती है। बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान जेडीयू के नेताओं की एक बैठक में नीतीश कुमार से मांग की गई थी कि वे अपने पुत्र को सक्रिय राजनीति में लाएं। लेकिन नीतीश कुमार ने इस पर कभी साफ प्रतिक्रिया नहीं दी। जब-जब यह सवाल उठा, तो या तो उन्होंने टाल दिया या फिर कहा कि यह फैसला निशांत को ही लेना है। वे जब चाहें पार्टी में आ सकते हैं। नीतीश का यह रुख उनकी पारिवारिक राजनीति से दूरी को दिखाता है।
निशांत कुमार खुद भी राजनीति में आने के लिए कभी उत्सुक नजर नहीं आए। चुनाव नतीजों के बाद नीतीश कुमार मंत्रिमंडल के शपथ ग्रहण समारोह में जब उनसे राजनीति में कब आएंगे, पूछा गया, तो 50 वर्षीय निशांत सिर्फ मुस्कुराकर चले गए। उन्होंने कभी कोई चुनाव नहीं लड़ा। कई राजनीतिक परिवारों में उत्तराधिकारी जल्दी मैदान में उतर आते हैं, लेकिन निशांत हमेशा सार्वजनिक जीवन से दूर रहे। उनके पिता नीतीश कुमार के पास मजबूत राजनीतिक विरासत है। नीतीश 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री बने हैं और करीब दो दशक से राज्य की कमान संभाल रहे हैं। उनका जनाधार खासकर महिलाओं में गहरा है।

पिता की राजनीतिक विरासत से दूर रहने वाले निशांत
निशांत कुमार के लिए राजनीतिक विरासत तैयार है, लेकिन वे इससे कोसों दूर हैं। नीतीश कुमार राजनीति में परिवारवाद के घोर विरोधी माने जाते हैं। वे अक्सर लालू यादव के परिवार को इस मुद्दे पर घेरते रहते हैं। शायद यही सिद्धांत नीतीश को निशांत को राजनीति में, खासकर जेडीयू में लाने से रोक रहा है। अगर निशांत को पार्टी में लाया गया, तो नीतीश की कथनी और करनी में फर्क को लेकर विपक्ष उन्हें निशाना बना सकता है। संजय झा का बयान इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण है। झा नीतीश के करीबी हैं और पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर उनकी बात का वजन है। उनका यह खुला न्योता पार्टी में निशांत की एंट्री को हरी झंडी जैसा लग रहा है।
बिहार की राजनीति में परिवारवाद एक बड़ा मुद्दा रहा है। नीतीश ने हमेशा इसे नकारा है, लेकिन अब पार्टी के अंदर से आने वाली आवाजें मजबूत हो रही हैं। निशांत अगर आते हैं, तो जेडीयू को नई ऊर्जा मिल सकती है। लेकिन उनका फैसला कब आएगा, यह देखना दिलचस्प होगा। झा का बयान साफ संकेत दे रहा है कि पार्टी तैयार है, बाकी निशांत पर निर्भर है। बिहार के लोग भी इसकी प्रतीक्षा कर रहे हैं।
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