बक्सर, 18 दिसंबर 2025: बक्सर जिले के राजपुर थाना क्षेत्र में रसेन गांव के पास सोमवार शाम हुई गोलीबारी की घटना ने अब नया मोड़ ले लिया है। घायल विजय शंकर चौबे के बयान पर पुलिस ने अहियापुर गांव के सात लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की है। इनमें से दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है, जबकि बाकियों की तलाश में छापेमारी चल रही है। यह मामला अब पुराने तिहरे हत्याकांड से जुड़ता दिख रहा है, जिससे इलाके में सनसनी फैल गई है।

थाना प्रभारी निवास कुमार ने बताया कि विजय शंकर चौबे के फर्द बयान के आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया है। नामजद आरोपियों में अजीत यादव और गुड्डू यादव (दोनों के पिता वीरेंद्र सिंह), सोनू यादव और मोनू यादव (पिता शिव शंकर सिंह), श्री यादव, अमित यादव और सिकंदर यादव शामिल हैं। पुलिस ने सोनू यादव और उनके पिता श्री उर्फ शिव शंकर यादव को पकड़कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। बाकी आरोपियों को जल्द पकड़ने के लिए टीम लगी हुई है।

घटनास्थल पर पहुंची एसएफएल टीम ने जांच की और वहां से 7 एमएम पिस्टल के आठ खाली खोखे और दो जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। इन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। याद होगा कि सोमवार शाम टहलते समय अचानक हमलावरों ने विजय शंकर चौबे और उनके रिश्तेदार रमाकांत पाठक पर गोलियां बरसाई थीं। रमाकांत पाठक को कई गोलियां लगीं और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। विजय शंकर चौबे गंभीर रूप से घायल हैं और बक्सर सदर अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है।

यह पूरा विवाद राजपुर थाना क्षेत्र के ही अहियापुर गांव में 24 मई 2025 को हुए सनसनीखेज तिहरे हत्याकांड से जुड़ा बताया जा रहा है। उस घटना में बालू-गिट्टी रखने के विवाद में अजीत यादव के पिता वीरेंद्र सिंह, चाचा विनोद सिंह और सुनील सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। परिवार के दो अन्य सदस्य भी बुरी तरह घायल हुए थे – एक का तो इलाज के दौरान पैर काटना पड़ा और दूसरा आज भी अपाहिज जीवन जी रहा है।

उस मामले में अजीत यादव ने 19 नामजद और तीन अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। मुख्य आरोपियों में पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष सविता देवी के पति मनोज यादव, पूर्व जिप उपाध्यक्ष संतोष यादव और बटेश्वर यादव शामिल थे। कई महीने बीत जाने के बाद भी प्रयुक्त हथियार बरामद नहीं हुए हैं। दबाव बढ़ने पर कुछ आरोपी आत्मसमर्पण कर चुके हैं और कुर्की-जब्ती की कार्रवाई भी हुई है।

अब रसेन हत्याकांड में अपना नाम आने के बाद अजीत यादव ने एक वीडियो जारी कर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि तिहरे हत्याकांड के बाद से उनके परिवार पर केस वापस लेने का दबाव डाला जा रहा है। आगामी 23 दिसंबर को चार्जशीट और गवाही की तारीख नजदीक आने पर धमकियां बढ़ गई हैं। पहले दो करोड़ रुपये और 10 बीघा जमीन, फिर पांच करोड़ और 15 बीघा जमीन का ऑफर दिया गया, लेकिन परिवार ने मना कर दिया। इसके जवाब में सुनियोजित तरीके से उनका नाम इस नए मामले में घसीटा गया।
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अजीत यादव ने दावा किया कि सरकारी सुरक्षा गार्ड उनके साथ तैनात हैं, फिर भी बिना सूचना उनके भाई सोनू को घर से उठाकर जेल भेज दिया गया। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से सीबीआई जांच की मांग की है। साथ ही डीजीपी विजय कुमार से केस एसटीएफ को सौंपने और पुलिस प्रशासन से परिवार की सुरक्षा बढ़ाने की अपील की है।

इन लगातार घटनाओं से रसेन और अहियापुर के आसपास के गांवों में दहशत का माहौल है। ग्रामीण परेशान हैं कि मामला उलझता जा रहा है। लोग न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं कि अहियापुर के पीड़ित परिवार को कब इंसाफ मिलेगा और इलाके में शांति लौटेगी। पुलिस सुरक्षा बढ़ा रही है, लेकिन पीड़ित परिवार अभी भी डर के साए में जी रहा है।
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