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रांची के मतवे गांव में नशेड़ी की क्रूरता: कफ सीरप के लिए डॉक्टर स्वपन दास की गला रेत हत्या, ग्रामीणों ने एक आरोपी को पकड़ा

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झारखंड के रांची जिले के बुधमू थाना क्षेत्र के मतवे गांव में रविवार सुबह एक ऐसी घटना घटी, जिसने पूरे इलाके को सदमे में डुबो दिया। पिछले दस साल से गांव को मुफ्त इलाज देने वाले डॉक्टर स्वपन दास की नशेड़ियों ने कफ सीरप के लालच में गला रेतकर हत्या कर दी। ग्रामीणों की तत्परता से एक आरोपी वारिस अंसारी को मौके पर ही पकड़ लिया गया, जबकि दूसरा आरोपी मांडर इलाके का रहने वाला भाग निकलने में कामयाब हो गया। पुलिस दूसरे आरोपी की तलाश में छापेमारी कर रही है। यह घटना न सिर्फ डॉक्टरों की सुरक्षा पर सवाल खड़ी करती है, बल्कि नशे की लत की भयावहता को भी उजागर करती है। आइए, जानते हैं इस दर्दनाक हादसे की पूरी कहानी और इसके पीछे की कड़वी सच्चाई।

सुबह की चैन टूटी: चीखों से गूंजा गांव

रविवार सुबह करीब आठ बजे मतवे गांव में सब कुछ शांत था। डॉक्टर स्वपन दास अपने किराये के मकान में रहते थे और उसी जगह क्लिनिक चलाते थे। वे पश्चिम बंगाल के चौबीस परगना जिले के राजापुर गांव के रहने वाले थे, लेकिन दस साल से झारखंड के इस छोटे से गांव को अपना घर बना चुके थे। सुबह ग्रामीणों ने अचानक चीखने की आवाज सुनी। जब वे दौड़कर कमरे में पहुंचे, तो नजारा देखकर सबके पैर जम गए। डॉक्टर स्वपन दास खून से लथपथ फर्श पर पड़े थे, और कमरे में वारिस अंसारी मौजूद था। ग्रामीणों ने तुरंत वारिस को पकड़ लिया और उसे भागने का मौका नहीं दिया। एक ग्रामीण ने बताया, “हमने आवाज सुनी तो दौड़े। डॉक्टर साहब का गला कटा हुआ था, और वारिस खून से सना चाकू हाथ में लिए खड़ा था। हमने उसे लोहे की रॉड से बांध लिया और पुलिस बुला ली।”

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घटना की सूचना मिलते ही बुधमू थाना पुलिस मौके पर पहुंची। थाना प्रभारी ने आरोपी को गिरफ्तार किया और घटनास्थल को सील कर दिया। फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) की टीम ने साक्ष्य इकट्ठा किए, जिसमें खून से सना चाकू और डॉक्टर के औजार शामिल हैं। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए रिम्स (राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस) भेज दिया गया। पुलिस के अनुसार, हत्या डॉक्टर के ही सर्जिकल औजार से की गई, जो आरोपी ने मौके पर ही उठा लिया था।

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नशे का लालच: कफ सीरप पर भड़का विवाद

पुलिस जांच में सामने आया कि हत्या नशे से जुड़े विवाद का नतीजा है। वारिस अंसारी गांव का ही रहने वाला है और लंबे समय से नशे का आदी बताया जा रहा है। रविवार सुबह वह अपने साथी (जो मांडर का रहने वाला है) के साथ क्लिनिक पहुंचा। दोनों ने कफ सीरप (जिसमें कोडीन होता है और नशेड़ियों का पसंदीदा नशा है) की मांग की। डॉक्टर स्वपन दास ने सिरप उपलब्ध न होने की बात कही, क्योंकि यह बिना प्रिस्क्रिप्शन नहीं दिया जाता। बात बढ़ी, तो बहस हो गई। गुस्से में वारिस ने डॉक्टर पर हमला कर दिया और गला रेत दिया। थाना प्रभारी ने बताया, “प्रारंभिक पूछताछ में वारिस ने कबूल किया कि नशे की तलब में ऐसा कदम उठाया। लेकिन जांच में पैसे के लेन-देन का एंगल भी निकला है। डॉक्टर ने कभी-कभी नशेड़ियों को मना किया था, जिससे पुरानी रंजिश थी।”

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दूसरा आरोपी भागने में सफल रहा, लेकिन ग्रामीणों ने उसकी पहचान बता दी। पुलिस मांडर इलाके में छापेमारी कर रही है। वारिस से लगातार पूछताछ हो रही है, और सीसीटीवी फुटेज भी चेक किए जा रहे हैं। एक ग्रामीण ने कहा, “डॉक्टर साहब ने कभी पैसे नहीं लिए, फिर भी नशेड़ियों ने उनकी जान ले ली। यह गांव का नुकसान है।”

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डॉक्टर स्वपन दास: गांव की लाइफलाइन, जो कभी मना न करते

स्वपन दास की हत्या ने मतवे गांव को गहरा सदमा दिया है। वे तबारक अंसारी के किराये के मकान में रहते थे और दिन-रात मरीजों का इलाज करते थे। ग्रामीणों का कहना है कि डॉक्टर साहब गांव की मेडिकल लाइफलाइन थे। गरीबों को मुफ्त दवा देते, रात के दो बजे भी कॉल पर पहुंच जाते। एक बुजुर्ग महिला ने आंसू पोछते हुए बताया, “मेरे पोते को बुखार था, डॉक्टर साहब रात में आए और दवा खुद लाए। कभी पैसे नहीं मांगे। अब कौन देखेगा हमारा इलाज?” डॉक्टर के परिवार में पत्नी और दो बच्चे हैं, जो पश्चिम बंगाल में रहते हैं। खबर मिलते ही वे रांची पहुंचे, और परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।

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गांव में डॉक्टर की याद में सन्नाटा पसर गया है। क्लिनिक के बाहर फूलमालाएं चढ़ाई जा रही हैं, और लोग प्रार्थना सभाएं कर रहे हैं। ग्रामीणों ने पुलिस से मांग की है कि आरोपी को फांसी की सजा दी जाए, ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। एक युवा ग्रामीण ने कहा, “डॉक्टर साहब ने सैकड़ों जानें बचाईं, लेकिन उनकी जान चली गई। नशे के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।”

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पुलिस की कार्रवाई: दूसरे आरोपी की तलाश तेज

बुधमू थाना प्रभारी ने बताया कि वारिस अंसारी को रिमांड पर लिया गया है। पूछताछ में नशे के अलावा आर्थिक विवाद का भी जिक्र आया – डॉक्टर ने कभी-कभी नशेड़ियों को उधार दिया था, जो चुकता न होने पर रंजिश बनी। पुलिस ने गांव में नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाने का फैसला किया है। एफएसएल रिपोर्ट आने पर और डिटेल्स सामने आएंगी। रांची एसएसपी ने कहा, “डॉक्टरों की सुरक्षा प्राथमिकता है। गांवों में मेडिकल कैंप्स बढ़ाएंगे।”

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यह घटना न सिर्फ मतवे गांव, बल्कि पूरे झारखंड के लिए चेतावनी है। नशे की लत कितनी खतरनाक हो सकती है, यह दिखाती है। ग्रामीणों की तत्परता ने कम से कम एक आरोपी को पकड़ लिया, लेकिन दूसरा फरार है। उम्मीद है कि न्याय मिलेगा और डॉक्टर स्वपन दास की आत्मा को शांति मिलेगी। गांव अब उनके बिना अधूरा सा लग रहा है।


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