बक्सर, 12 दिसंबर 2025: वीर कुंवर सिंह कॉलोनी में स्थित रेडिएंट पब्लिक स्कूल के छात्र-छात्राएं और शिक्षक शुक्रवार सुबह दो दिवसीय शैक्षणिक परिभ्रमण के लिए अयोध्या की ओर रवाना हो गए। तीन बसों में सवार कुल 105 सीनियर विंग के विद्यार्थी जय श्रीराम के जोरदार जयकारों के साथ यात्रा पर निकले। स्कूल की ओर से यह यात्रा प्रभु श्रीराम की जन्मस्थली की भव्य धरोहरों को देखने, रामलला के दर्शन करने और सनातन संस्कृति से परिचय कराने के उद्देश्य से आयोजित की गई है। बच्चे और उनके अभिभावक इस दौरे को लेकर काफी उत्साहित हैं, जो शिक्षा को धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने का एक अनोखा अवसर प्रदान करेगा।
स्कूल के निदेशक जय प्रकाश सिंह ने यात्रा की शुरुआत में बच्चों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि यह परिभ्रमण पहले से ही योजनाबद्ध था। उन्होंने बताया कि अयोध्या की यह यात्रा बच्चों को मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जीवन से प्रेरणा लेने का मौका देगी। “प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि पर जाकर बच्चे सनातन संस्कृति की गहराई समझेंगे। यह न केवल शैक्षणिक है, बल्कि उनके व्यक्तित्व निर्माण में भी मददगार साबित होगा।” जय प्रकाश सिंह ने जोर देकर कहा कि अभिभावकों की सहमति से यह कार्यक्रम तैयार किया गया है, और बच्चे इस अनुभव से काफी रोमांचित महसूस कर रहे हैं। बसों में सवार होते समय बच्चों के चेहरों पर जो खुशी थी, वह देखते ही बनती थी।

यात्रा का कार्यक्रम काफी सुनियोजित है। अयोध्या पहुंचने पर सबसे पहले दल हनुमानगढ़ी मंदिर में दर्शन करेगा, जहां हनुमान जी की आराधना से दिन की शुरुआत होगी। इसके बाद मुख्य आकर्षण श्रीराम जन्मभूमि स्थित भव्य मंदिर होगा, जहां रामलला के दर्शन किए जाएंगे। सरयू तट का अवलोकन भी कार्यक्रम में शामिल है, जो बच्चों को ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व समझाएगा। दल का रात्रि विश्राम अयोध्या में ही होगा, और शनिवार को वापस बक्सर लौटने की योजना है। स्कूल की प्राचार्या श्यामली सिंह ने कहा कि यह यात्रा बच्चों के लिए एक प्रेरणादायक अनुभव बनेगी। “बच्चों को श्रीराम के आदर्श, संस्कार और सनातन संस्कृति के गौरवशाली इतिहास की सीख मिलेगी। वे हमारे भविष्य का आधार हैं, और रामराज्य जैसे आदर्श समाज के निर्माण में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होगी।”

यह शैक्षणिक परिभ्रमण रेडिएंट पब्लिक स्कूल की उस परंपरा का हिस्सा है, जहां पढ़ाई को व्यावहारिक अनुभवों से जोड़ा जाता है। बच्चे न केवल किताबी ज्ञान से आगे बढ़ेंगे, बल्कि धार्मिक स्थलों के दर्शन से नैतिक मूल्यों को आत्मसात करेंगे। अभिभावकों का कहना है कि ऐसी यात्राएं बच्चों की जिज्ञासा बढ़ाती हैं और उन्हें इतिहास से जोड़ती हैं। एक अभिभावक ने बताया, “मेरा बच्चा रामायण की कहानियां सुनता है, लेकिन अयोध्या जाकर उसे जीवंत अनुभव मिलेगा। स्कूल का यह प्रयास सराहनीय है।” यात्रा के दौरान सुरक्षा और सुविधाओं का पूरा ख्याल रखा गया है, जिसमें शिक्षकों की टीम बच्चों के साथ रहेगी।
बक्सर जैसे छोटे शहर से ऐसी शैक्षणिक पहल सराहनीय है, जो बच्चों को देश की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ती है। जय प्रकाश सिंह और श्यामली सिंह जैसे स्कूल प्रबंधन की दृष्टि से यह स्पष्ट है कि शिक्षा सिर्फ क्लासरूम तक सीमित नहीं होनी चाहिए। आने वाले दिनों में वापसी पर बच्चों के अनुभव सुनना रोचक होगा, जो अन्य छात्रों को भी प्रेरित कर सकता है। यह यात्रा न केवल धार्मिक है, बल्कि शैक्षणिक मूल्यों को मजबूत करने वाली साबित होगी।
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