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पटना पर ‘तीसरी आंख’ की सख्त नजर: नई सरकार की अपराध-नियंत्रण रणनीति से शहर बनेगा सुरक्षित किला, रोमियो गैंग पर लगाम

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पटना, 4 दिसंबर 2025: बिहार की राजधानी पटना, जो कभी अपराध और ट्रैफिक जाम की मार झेलती रही, अब नई सरकार के सख्त इरादों से एक अभेद्य सुरक्षा कवच में ढल रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने शपथ लेते ही कानून-व्यवस्था को मजबूत करने का वादा किया था, और अब वो वादा अमल में आ रहा है। गृह मंत्री सम्राट चौधरी की अगुवाई में ‘तीसरी आंख’ यानी सीसीटीवी कैमरों का जाल बिछाया जा रहा है, जो न सिर्फ अपराधियों को चेतावनी दे रहा है, बल्कि शहर की युवतियों और छात्राओं को भी सुरक्षा का एहसास करा रहा है। खासकर स्कूल-कॉलेजों के बाहर ‘रोमियो’ टाइप उपद्रवियों पर अब विशेष निगरानी होगी। स्मार्ट सिटी मिशन के तहत पहले ही 3,357 कैमरे लग चुके हैं, और अब 650 और की योजना से शहर की नस-नस पर नजर रखी जाएगी। यह कदम न सिर्फ अपराध कम करेगा, बल्कि ट्रैफिक व्यवस्था को भी पारदर्शी बनाएगा – जहां चालान कटना अब खिलाड़ियों का खेल नहीं, बल्कि तकनीक का कमाल होगा।

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सम्राट चौधरी ने शपथ ग्रहण के ठीक बाद कहा था, “बिहार अपराधियों का अड्डा नहीं, यहां जीरो टॉलरेंस होगा।” उनके इस बयान ने पूरे राज्य में सनसनी फैला दी। हाल ही में पटना के एक सार्वजनिक कार्यक्रम में उन्होंने दो टूक चेतावनी दी: “शराब, रेत और जमीन माफिया को बख्शा नहीं जाएगा। 400 अपराधियों की लिस्ट तैयार है, कोर्ट के आदेश पर उनकी संपत्ति जब्त होगी और जेल की सैर कराई जाएगी।” चौधरी ने साफ कहा कि पुलिस को पूरी छूट दी गई है – एनकाउंटर हो या स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की तैनाती, अपराध पर लगाम कसना पहली प्राथमिकता। खासकर महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा पर फोकस करते हुए उन्होंने ‘एंटी-रोमियो स्क्वायड’ का ऐलान किया। “स्कूल-कॉलेजों के बाहर गश्त बढ़ेगी, छुट्टियों में भी विशेष फोर्स तैनात रहेगी। कोई उपद्रवी नहीं बचेगा,” उन्होंने कहा। यह बयान उन हालिया घटनाओं के बाद आया, जब पटना के कुछ इलाकों में छात्राओं के साथ छेड़खानी की खबरें सुर्खियां बनीं। स्थानीय लोग इसे सराह रहे हैं। एक कॉलेज छात्रा ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “पहले सड़क पर अकेले निकलना डरावना लगता था, लेकिन अब कैमरों की नजर से थोड़ी सुकून मिलेगा।”

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स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत पटना में सीसीटीवी नेटवर्क का विस्तार तेज हो गया है। वर्तमान में 415 लोकेशंस पर 3,357 हाई-रेजोल्यूशन कैमरे लगे हैं, जो इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) से 24×7 मॉनिटर हो रहे हैं। ये कैमरे फेस रिकग्निशन, नंबर प्लेट डिटेक्शन और स्पीड वायलेशन जैसी एडवांस्ड टेक्नोलॉजी से लैस हैं। अब नई सरकार ने 197 अतिरिक्त साइट्स पर 650 कैमरे लगाने की मंजूरी दी है, जिसकी लागत करोड़ों में है। इनमें VVIP इलाके जैसे अशोक राजपथ, बोरिंग रोड, हार्डिंग रोड शामिल हैं। अशोक राजपथ पर नवनिर्मित डबल डेकर ब्रिज, सभ्यता द्वार से दीदारगंज तक का रूट, और शहर के सभी प्रवेश-निकास द्वार अब कैमरों की चपेट में आएंगे। पटना स्मार्ट सिटी लिमिटेड के एक अधिकारी ने बताया, “ये कैमरे अपराधों की तुरंत पहचान करेंगे। किसी घटना पर अलर्ट सिस्टम से पुलिस 5 मिनट में मौके पर पहुंच सकेगी।” नगर निगम ने भी 650 जगहों पर और कैमरे लगाने का प्रस्ताव भेजा है, जिसकी स्वीकृति जल्द मिलने की उम्मीद है।

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पुलिस थानों में भी क्रांति आ रही है। हाल ही में कैबिनेट ने 280 करोड़ रुपये मंजूर किए, जिससे नए थानों में कैमरे लगेंगे। पूरे बिहार में 6,138 कैमरों का नेटवर्क पहले से ही सक्रिय है, जिसमें पटना के 3,300 कैमरे प्रमुख हैं। इनकी मदद से अपराध दर में 20% की गिरावट दर्ज की गई है। भागलपुर, मुजफ्फरपुर और बिहारशरीफ जैसे शहरों में भी इसी मॉडल को अपनाया गया, जहां चोरी-हत्या जैसे केसों की जांच आसान हुई। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, “केंद्र सरकार की मदद से ये सिस्टम और मजबूत हो रहा है। साइबर क्राइम पर भी नजर, ऑनलाइन फ्रॉड और सोशल मीडिया पर गाली-गलौज करने वालों को चेतावनी।”

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ट्रैफिक कंट्रोल में ‘तीसरी आंख’ का कमाल देखने लायक है। पटना की सड़कों पर जाम और उल्लंघन आम थे, लेकिन अब 30 जगहों पर एडाप्टिव ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम (ATCS), 30 रेड-लाइट जंप डिटेक्टर, 28 ANPR (ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) और 12 स्पीड वायलेशन कैमरे सक्रिय हैं। नतीजा? 2024-25 में 141.85 करोड़ रुपये के चालान वसूले गए, जो पिछले साल से 20% ज्यादा है। बिना हेलमेट या सीट बेल्ट के चालान अब ऑटोमेटिक कटते हैं – कोई रिश्वत या बहाना नहीं चलेगा। 26 जिलों में 72 चौराहों पर और कैमरे लगने हैं, जिसकी लागत 35 करोड़ है। एक ट्रैफिक वार्डन ने हंसते हुए कहा, “पहले ड्राइवरों से मिन्नतें करनी पड़ती थीं, अब कैमरा सब देख लेता है। सड़कें साफ हो गईं।” यह सिस्टम न सिर्फ राजस्व बढ़ा रहा है, बल्कि दुर्घटनाओं में 15% कमी लाया है।

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नई सरकार का यह कदम बिहार के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है। सम्राट चौधरी ने कहा, “नीतीश जी का गुड गवर्नेंस मॉडल हम मजबूत करेंगे। अपराधी भागेंगे, नागरिक सुरक्षित रहेंगे।” लेकिन चुनौतियां भी हैं – मेंटेनेंस, प्राइवेसी कंसर्न और ग्रामीण इलाकों तक पहुंच। फिर भी, पटना के लोग उम्मीद बांधे हैं। एक बुजुर्ग निवासी ने कहा, “बेटी को कॉलेज भेजना अब आसान लगेगा। सरकार ने जो कहा, वो कर दिखाया।” यह पहल अगर सफल रही, तो पटना न सिर्फ सुरक्षित बनेगा, बल्कि स्मार्ट सिटी का सच्चा मॉडल भी।

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पटना सीसीटीवी नेटवर्क: मुख्य आंकड़े

  • वर्तमान कैमरे: 3,357 (415 लोकेशंस पर)।
  • नई योजना: 650 कैमरे (197 साइट्स पर), खासकर VVIP इलाकों में।
  • ट्रैफिक फीचर्स: 30 ATCS, 30 रेड-लाइट डिटेक्टर, 28 ANPR।
  • राजस्व: 2024-25 में 141.85 करोड़ चालान।
  • लक्ष्य: अपराध दर 20% कम, दुर्घटना में 15% गिरावट।
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(यह रिपोर्ट आधिकारिक स्रोतों, गृह विभाग के बयानों और स्थानीय फीडबैक पर आधारित है। अपडेट्स के लिए जुड़े रहें।)


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