पटना खेमका हत्याकांड: एनकाउंटर में ढेर हुआ अपराधी, बिजनेस रंजिश में हुई थी गोपाल खेमका की हत्या

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पटना, बिहार – बिहार की राजधानी पटना में हुए हाई-प्रोफाइल गोपाल खेमका हत्याकांड में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक मुख्य संदिग्ध, विकास उर्फ राजा, को मुठभेड़ में मार गिराया है। यह घटना मंगलवार, 8 जुलाई 2025 को तड़के 2:45 बजे पटना सिटी के मालसलामी क्षेत्र में दमराही घाट के पास हुई। पुलिस के अनुसार, विकास उर्फ राजा इस हत्याकांड में हथियार सप्लाई करने वाला प्रमुख आरोपी था, जिसने मुख्य शूटर उमेश यादव को हत्या में इस्तेमाल होने वाला हथियार उपलब्ध कराया था।

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हत्याकांड का खुलासा: बिजनेस रंजिश थी कारण

पटना पुलिस ने इस मामले में तेजी से कार्रवाई करते हुए हत्याकांड के पीछे की वजह को उजागर किया है। जांच में पता चला कि गोपाल खेमका की हत्या एक बिजनेस रंजिश के चलते कराई गई थी। मुख्य मास्टरमाइंड के रूप में स्थानीय लोहा व्यापारी अशोक साह की पहचान हुई है, जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। अशोक साह ने कथित तौर पर उमेश यादव को 10 लाख रुपये की सुपारी दी थी, जिसमें से 50 हजार रुपये एडवांस के रूप में दिए गए थे। यह साजिश करीब डेढ़ महीने पहले रची गई थी, और हत्या का कारण जमीन विवाद बताया जा रहा है।

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पटना के गांधी मैदान क्षेत्र में 4 जुलाई 2025 को रात 11:40 बजे गोपाल खेमका (65), एक जाने-माने व्यवसायी और पूर्व बीजेपी नेता, को उनके घर के मुख्य द्वार पर बाइक सवार हमलावर ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। खेमका उस समय अपनी कार में थे और घर का गेट खुलने का इंतजार कर रहे थे। हमलावर ने पॉइंट-ब्लैंक रेंज से गोली चलाई, जिसके बाद खेमका को नजदीकी मेडिवर्सल मल्टी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

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एनकाउंटर की कहानी: विकास उर्फ राजा ढेर

पटना पुलिस को इस हत्याकांड में शामिल संदिग्धों की तलाश में कई सुराग मिले थे। सोमवार को मुख्य शूटर उमेश यादव और एक अन्य संदिग्ध अजय शॉ को गिरफ्तार किया गया था। उमेश की पूछताछ में विकास उर्फ राजा का नाम सामने आया, जो हत्या में इस्तेमाल हथियार का सप्लायर था। पुलिस ने मंगलवार तड़के मालसलामी क्षेत्र में विकास के घर पर छापेमारी की। पुलिस के अनुसार, विकास ने पूछताछ के दौरान पुलिस पर गोली चलाई, जिसके जवाब में पुलिस ने आत्मरक्षा में फायरिंग की, जिसमें विकास मारा गया। घटनास्थल से एक पिस्तौल, एक गोली और एक कारतूस बरामद किया गया। विकास का शव पोस्टमॉर्टम के लिए नालंदा मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल भेजा गया है।

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हालांकि, विकास की मां, शांति देवी, ने इस एनकाउंटर पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, “मुझे नहीं पता कि मेरा बेटा क्या करता था। वह चेन्नई में काम करता था। पुलिस ने उसे क्यों मारा?” शांति देवी का यह बयान एनकाउंटर की परिस्थितियों पर सवाल उठाता है, लेकिन पुलिस ने दावा किया है कि विकास का आपराधिक इतिहास रहा है और वह कई हत्या और शूटिंग के मामलों में शामिल था।

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जांच में प्रगति: SIT का गठन

बिहार पुलिस ने इस हत्याकांड की गहन जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है, जिसकी अगुवाई पटना सेंट्रल एसपी कर रहे हैं। SIT ने अब तक 12 संदिग्धों को हिरासत में लिया है, जिनमें उमेश यादव, अशोक साह और अजय शॉ शामिल हैं। पुलिस ने कोतवाली थाना क्षेत्र के उदयगिरी अपार्टमेंट और गंगा नदी के किनारे से हथियार बरामद किए हैं। बिहार के डीजीपी विनय कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “हमने हत्या में इस्तेमाल हथियार बरामद कर लिया है। जांच तेजी से आगे बढ़ रही है, और जल्द ही सभी तथ्य स्पष्ट होंगे।”

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पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या गोपाल खेमका की हत्या का उनके बेटे गूंजन खेमका की 2018 में हाजीपुर में हुई हत्या से कोई संबंध है। गूंजन की हत्या भी एक सनसनीखेज घटना थी, जिसके बाद खेमका परिवार को सुरक्षा प्रदान की गई थी, लेकिन अप्रैल 2024 में उनकी सुरक्षा हटा ली गई थी। गोपाल खेमका के दूसरे बेटे, गौरव खेमका, ने अब परिवार के लिए पुलिस सुरक्षा की मांग की है।

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सियासी तूफान और कानून-व्यवस्था पर सवाल

इस हत्याकांड ने बिहार में कानून-व्यवस्था को लेकर सियासी घमासान मचा दिया है। विपक्षी नेता, खासकर RJD के तेजस्वी यादव, ने नीतीश कुमार सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “बिहार में कारोबारियों की हत्या हो रही है, लेकिन इसे जंगल राज नहीं कहा जा सकता। सरकार की नाकामी साफ दिख रही है।” वहीं, JDU और बीजेपी ने सरकार का बचाव करते हुए कहा कि अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने डीजीपी को इस मामले को जल्द सुलझाने का निर्देश दिया है।

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पटना में हाल के महीनों में कारोबारियों पर हमले की घटनाएं बढ़ी हैं। 2025 की पहली छमाही में कम से कम आठ प्रमुख कारोबारियों की हत्या हुई है, जिनमें अनजनी सिंह (पटना), रजी अहमद (नालंदा), और विनय गुप्ता (भागलपुर) शामिल हैं। इन घटनाओं ने बिहार के बिजनेस समुदाय में दहशत पैदा कर दी है।

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जनता में आक्रोश, पुलिस पर दबाव

गोपाल खेमका हत्याकांड ने न केवल बिहार की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं, बल्कि यह भी दर्शाता है कि बिजनेस रंजिश और आपराधिक गतिविधियां कितनी गहरी जड़ें जमा चुकी हैं। पुलिस की त्वरित कार्रवाई और एनकाउंटर ने मामले को सुलझाने की दिशा में प्रगति दिखाई है, लेकिन विकास उर्फ राजा की मां के सवाल और विपक्ष के आरोप इस मामले को और जटिल बना रहे हैं। बिहार विधानसभा चुनाव से पहले यह मामला सियासी रंग ले चुका है, और जनता की नजर अब इस बात पर है कि क्या पुलिस इस साजिश के सभी पहलुओं को उजागर कर पाएगी।

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