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परमहंस पब्लिक स्कूल पकड़ी मोड़ इटारी में बाल मेला: बच्चों ने स्वाद और समझ से जीता दिल, चाउमीन स्टॉल सबसे लोकप्रिय

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बक्सर। इटारी प्रखंड के पकड़ी मोड़ स्थित परमहंस पब्लिक स्कूल में आयोजित बाल मेले में बच्चों का उत्साह देखते ही बनता था। स्कूल परिसर रंग-बिरंगे स्टॉल, खिलखिलाती हंसी और व्यंजनों की खुशबू से महक उठा। बच्चों ने खुद हाथों से तैयार किए गए खाने-पीने के स्टॉल लगाए और व्यावसायिक कौशल दिखाकर सबका दिल जीत लिया।

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बाल मेले में बच्चों ने चाउमीन, बर्गर, मंचूरियन, समोसा, चिप्स, बिस्कुट और चॉकलेट जैसे आकर्षक व्यंजन बनाए और बेचे। खास बात यह रही कि चाउमीन का स्टॉल सबसे ज्यादा भीड़ खींचने वाला रहा। बच्चे खुद ग्राहक बुलाते, ऑर्डर लेते, पैसे वसूलते और हिसाब-किताब रखते नजर आए। इससे उनकी व्यावसायिक समझ, आत्मविश्वास और जिम्मेदारी का अहसास साफ झलक रहा था।

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मनोरंजन के लिए मिकी माउस स्लाइडिंग, जंपिंग यार्ड, प्लेन स्लाइडर और झूले लगाए गए थे। खिलौनों, गुब्बारों और बांसुरियों की दुकानों पर भी बच्चों की भारी भीड़ रही। मेले की चहल-पहल देर शाम तक बनी रही।

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जिला शिक्षा पदाधिकारी संरक्षक ओम प्रकाश मिश्रा ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम बच्चों के शारीरिक और नैतिक विकास में बहुत मदद करते हैं। बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक ज्ञान भी देना जरूरी है, ताकि वे हर क्षेत्र में परिपूर्ण बन सकें।

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विद्यालय की निदेशक बजरंगी मिश्रा ने बताया कि बाल मेला बच्चों को किताबों से बाहर की दुनिया समझाने का सशक्त माध्यम है। इससे उनकी रचनात्मकता, टीमवर्क और निर्णय क्षमता विकसित होती है। प्रिंसिपल नम्रता मिश्रा ने कहा कि ऐसे आयोजन बच्चों में संस्कार, रचनात्मकता और व्यापारिक कौशल का अनूठा संगम पैदा करते हैं।

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बाल मेले में जूही कुमारी, शालू चौबे, आयुषी कुमारी, दिव्या कुमारी, शुभम कुमार, शशि कुमार, चितरंजन कुमार सहित कई बच्चे सक्रिय रूप से भाग ले रहे थे। मुख्य अतिथि के रूप में बृजेश पाठक, कुकुढ़ा पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि विनोद चौबे, बड़कागांव पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि मुन्ना चौबे, सुदर्शन यादव, इटारी प्रखंड कांग्रेस अध्यक्ष कमल पाठक, वार्ड सदस्य गुड्डू चौबे, धर्मेंद्र यादव, आनंद सिंह, चिंटू तिवारी, सर्वेश राय, दुर्गेश राय, गुप्तेश्वर चौबे सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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शिक्षक-शिक्षिकाओं और स्टाफ ने मेले को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई। कुल मिलाकर, परमहंस पब्लिक स्कूल का यह बाल मेला बच्चों के लिए सीख, आनंद और संस्कार का ऐसा अनुभव बन गया, जिसे वे लंबे समय तक याद रखेंगे। ऐसे आयोजन ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों की बहुमुखी प्रतिभा को निखारने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं।

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