तेल की कीमतों में उछाल: इराकी जलक्षेत्र में टैंकर हमलों के बाद पश्चिम एशिया युद्ध बढ़ने से आपूर्ति चिंता

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नई दिल्ली: वैश्विक तेल बाजार में अचानक उछाल देखने को मिला है। इराकी जलक्षेत्र में दो विदेशी टैंकरों पर हुए हमलों के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई। पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के बीच यह घटना ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने की आशंका को बढ़ा रही है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र से विश्व की एक बड़ी हिस्से की तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

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इराकी बंदरगाह अधिकारियों के अनुसार, बुधवार को दो विदेशी टैंकरों पर हमला हुआ। ये टैंकर इराकी ईंधन तेल ले जा रहे थे। हमले में विस्फोटक से लैस नावों का इस्तेमाल किया गया, जिससे दोनों टैंकर आग की चपेट में आ गए। एक चालक दल का सदस्य घायल हो गया। इराकी सुरक्षा अधिकारियों की प्रारंभिक जांच में हमले की जिम्मेदारी ईरानी नावों पर मानी गई। इसके बाद इराक ने अपने सभी तेल निर्यात टर्मिनलों पर काम रोक दिया।

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यह घटना पर्सियन गल्फ के उत्तरी हिस्से में हुई, जहां इराक और कुवैत के पास टैंकरों पर हमले की रिपोर्ट आई। हमलों के बाद शिपिंग गतिविधियां प्रभावित हुईं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुजरने वाली तेल आपूर्ति पर भी असर पड़ा है। इस जलडमरूमध्य से विश्व की लगभग एक-पांचवीं तेल व्यापार होती है। हमलों के कारण क्षेत्र में तेल निर्यात सुविधाएं बंद हो गईं, जिससे बाजार में आपूर्ति बाधित होने का डर बढ़ गया।

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तेल की कीमतों में यह उछाल एशियाई बाजार में देखा गया। ब्रेंट क्रूड 9 प्रतिशत तक बढ़कर 100 डॉलर के पार पहुंच गया। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी 6.5 प्रतिशत ऊपर चढ़कर 91 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। बाजार में चिंता इस बात को लेकर है कि पश्चिम एशिया में बढ़ता संघर्ष लंबा खिंच सकता है और तेल उत्पादन वाले प्रमुख क्षेत्रों में आपूर्ति श्रृंखला टूट सकती है।

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इराक के बंदरगाह महानिदेशक फरहान अल-फरतूसी ने हमलों की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि हमले इराक के क्षेत्रीय जल में हुए। इसके बाद इराकी तेल निर्यातक संगठन ने सभी टर्मिनलों पर काम रोकने का फैसला लिया। क्षेत्र में शिपिंग कंपनियों ने भी सुरक्षा चेतावनी जारी की। इस घटना से पहले भी पर्सियन गल्फ में कई जहाजों पर हमले की रिपोर्ट आई थी, लेकिन यह सबसे ताजा घटना है।

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विश्व ऊर्जा बाजार इस घटना से प्रभावित हो रहा है। कई देश तेल आयात पर निर्भर हैं और कीमतों में उछाल से उनकी अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि संघर्ष जारी रहा तो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल परिवहन पूरी तरह प्रभावित हो सकता है। कुछ देशों ने रणनीतिक तेल भंडार से आपूर्ति बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है, लेकिन यह राहत सीमित हो सकती है।

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बाजार में अस्थिरता बढ़ने से शेयर बाजारों पर भी असर पड़ा। एशिया और यूरोप के कई सूचकांक नीचे आए। तेल की कीमतें बढ़ने से मुद्रास्फीति की चिंता भी बढ़ गई है। वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की मांग को देखते हुए यह घटना महत्वपूर्ण है। इराक तेल निर्यात का प्रमुख देश है और यहां की सुविधाएं बंद होने से वैश्विक आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है।

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यह विकास पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का हिस्सा है। क्षेत्र में तेल और परिवहन सुविधाओं पर हमले बढ़ रहे हैं। इराकी अधिकारियों ने हमलों को साबोटाज बताया। अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा एजेंसियों ने जहाजों को सतर्क रहने की सलाह दी है। तेल बाजार की स्थिति पर नजर रखी जा रही है और आगे की घटनाएं कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं|


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