पटना, 16 दिसंबर 2025: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का एक वीडियो इन दिनों खूब चर्चा में है। इस वीडियो में वे एक महिला चिकित्सक को नियुक्ति पत्र सौंपते हुए उनका हिजाब हटा देते नजर आ रहे हैं। घटना पटना के सचिवालय संवाद में हुई, जहां AYUSH डॉक्टर्स को नियुक्ति पत्र वितरित किए जा रहे थे। विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए सवाल उठाए हैं कि आखिर यह व्यवहार क्यों? यह वीडियो न सिर्फ राजनीतिक बहस छेड़ रहा है, बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता पर भी सवाल खड़े कर रहा है।

घटना 15 दिसंबर को दोपहर के समय घटी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने AYUSH विभाग में चयनित 10 डॉक्टर्स को व्यक्तिगत रूप से नियुक्ति पत्र सौंपे, जबकि बाकी सभी को ऑनलाइन पत्र मिले। इनमें से एक नुसरत प्रवीण थीं, जो हिजाब पहने मंच पर पहुंचीं। हिजाब उनके चेहरे को आंशिक रूप से ढके हुए था। जब नुसरत प्रवीण आगे बढ़ीं, तो 75 वर्षीय नीतीश कुमार ने उन्हें देखा और चौंकते हुए कहा, “यह क्या है?” फिर उन्होंने हाथ बढ़ाकर हिजाब को नीचे खींच दिया। यह पूरा पल कैमरे में कैद हो गया और जल्द ही वायरल हो गया। वरिष्ठ मंत्री और उपमुख्यमंत्री भी मंच पर मौजूद थे, लेकिन किसी ने हस्तक्षेप नहीं किया। नुसरत प्रवीण शांत भाव से पत्र लेती रहीं, लेकिन यह दृश्य देखने वालों को असहज कर गया।

RJD की कड़ी निंदा: ‘नीतीश जी को क्या हो गया?’
RJD ने इस घटना को मुख्यमंत्री की मानसिक स्थिति पर सवाल उठाने का मौका बनाया। पार्टी ने कहा कि यह व्यवहार न सिर्फ एक महिला की निजता का उल्लंघन है, बल्कि धार्मिक संवेदनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है। RJD प्रवक्ता ने प्रतिक्रिया में पूछा, “नीतीश जी को क्या हो गया? एक महिला डॉक्टर का हिजाब हटाना किस मर्यादा की बात है?” उन्होंने इसे मुख्यमंत्री के स्वास्थ्य और निर्णय क्षमता पर सवालिया निशान लगाते हुए इस्तीफे की मांग भी की। RJD का यह बयान बिहार की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर रहा है, खासकर जब राज्य में सामाजिक सद्भाव को लेकर चर्चाएं गर्म हैं। विपक्ष का कहना है कि सरकारी आयोजन में ऐसी घटना महिलाओं के सम्मान को कमजोर करती है।
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यह घटना AYUSH विभाग की भर्ती प्रक्रिया के बीच हुई, जो बिहार सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में एक कदम थी। AYUSH में आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी जैसी चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए 100 से अधिक डॉक्टर्स का चयन किया गया। लेकिन नियुक्ति पत्र वितरण का यह पल अब विवाद का केंद्र बन गया है। नुसरत प्रवीण, जो पटना मेडिकल कॉलेज से यूनानी चिकित्सा में विशेषज्ञ हैं, पहली बार सरकारी सेवा में कदम रख रही थीं। उनकी नियुक्ति पत्र प्राप्ति का यह क्षण उम्मीदों भरा था, लेकिन हिजाब हटाने की घटना ने सबका ध्यान खींच लिया। स्थानीय लोग कहते हैं कि मुख्यमंत्री का यह आचरण अनजाने में हुआ हो सकता है, लेकिन इसका प्रभाव गहरा है।

राजनीतिक बहस तेज: सम्मान और संवेदनशीलता का सवाल
बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार का नाम हमेशा बहस का विषय रहता है। NDA सरकार में उनकी भूमिका मजबूत है, लेकिन विपक्ष उन्हें निशाना बनाता रहता है। इस घटना ने कांग्रेस जैसे अन्य दलों को भी मैदान में उतार दिया। कांग्रेस ने इसे “अपमानजनक कृत्य” बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री को महिलाओं की गरिमा का सम्मान करना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी आयोजनों में सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता को ध्यान में रखना जरूरी है। एक वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक ने कहा, “यह छोटी लगने वाली घटना बड़े संदेश देती है। महिलाओं को उनके व्यक्तिगत चुनाव के लिए सम्मान मिलना चाहिए, चाहे वह कोई भी हो।”
नुसरत प्रवीण ने इस पर कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन उनके परिवार और सहकर्मी चुप्पी साधे हैं। घटना के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया, जो विवाद को और हवा दे रहा है। बिहार जैसे राज्य में, जहां विभिन्न समुदाय एक साथ रहते हैं, ऐसी घटनाएं सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित करती हैं। युवा डॉक्टर नुसरत प्रवीण अब अपनी नई जिम्मेदारी निभाने को तैयार हैं, लेकिन यह वीडियो उनके करियर की शुरुआत को एक विवादास्पद शुरुआत दे गया।

यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है कि राजनीतिक नेता सार्वजनिक जीवन में कैसे व्यवहार करें। सम्मान और संवेदनशीलता ही समाज को मजबूत बनाती है। RJD का सवाल जायज है, लेकिन उम्मीद है कि इससे सीख ली जाएगी। बिहार के लोग अब इंतजार कर रहे हैं कि सरकार इस पर क्या कहती है।
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