बक्सर, 5 दिसंबर 2025: बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ गोप गुट के जिला सचिव और समाहरणालय पंचायत शाखा में प्रधान लिपिक महेंद्र प्रसाद का गुरुवार रात करीब 2:30 बजे इलाज के दौरान निधन हो गया। दो दिन पहले हार्ट अटैक के बाद उनकी हालत बिगड़ गई थी, और गंभीर अवस्था में उन्हें बीएचयू वाराणसी ले जाया गया था। वहां डॉक्टरों की पूरी कोशिश के बावजूद वे बच न सके। सुबह उनकी यह दुखद खबर जिले में फैलते ही कर्मचारियों, शिक्षकों और आम लोगों में सन्नाटा छा गया। चीनी मिल स्थित उनके घर पर सांत्वना देने वालों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। पार्थिव शरीर के पहुंचते ही पूरा इलाका गमगीन हो गया। महासंघ के अलावा बुद्धिजीवी वर्ग और साधारण नागरिक भी इस अपूरणीय क्षति से स्तब्ध हैं।
महेंद्र प्रसाद का जाना जिले के कर्मचारी आंदोलन के लिए गहरा आघात है। वे लंबे समय से महासंघ गोप गुट के जिला सचिव थे, और उनकी कार्यकुशलता व मिलनसार स्वभाव के कारण सभी के चहेते थे। हाल ही में महासंघ के 23वें राज्य सम्मेलन को सफल बनाने में उनकी अहम भूमिका रही। एक सहकर्मी ने बताया, “महेंद्र जी हमेशा हंसते-मुस्कुराते रहते थे। ऑफिस में छोटी-बड़ी समस्या सुलझाते, और घर-परिवार की तरह सबको अपना मानते। उनका निधन सुनकर आंखें नम हो गईं।” उनके परिवार में पत्नी, दो पुत्र और एक पुत्री हैं। बड़े पुत्र ने चरित्रवन में अंतिम संस्कार के दौरान मुखाग्नि दी।
शोक सभा में दो मिनट का मौन, लवकुश सिंह बोले- अपूरणीय क्षति
दिन में करीब 11 बजे चीनी मिल स्थित उनके आवास पर शोक सभा आयोजित की गई। महासंघ के राज्य सचिव लवकुश सिंह ने इसका संचालन किया। सभा की शुरुआत दो मिनट के मौन से हुई, जिसमें सभी ने दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि दी। लवकुश सिंह ने भावुक होकर कहा, “महेंद्र जी का निधन महासंघ के लिए अपूरणीय क्षति है। उनकी यादें सदैव हमारे बीच जीवित रहेंगी। वे न सिर्फ नेता थे, बल्कि सबके मार्गदर्शक भी।” सभा में दर्जनों कर्मचारी और सहयोगी पहुंचे। इसके बाद चरित्रवन की ओर शवयात्रा निकाली गई, जिसमें सैकड़ों लोग शामिल हुए। यात्रा के दौरान नारे लगे – ‘महेंद्र प्रसाद अमर रहें’। चरित्रवन में बड़ी भीड़ के बीच अंतिम संस्कार संपन्न हुआ।

शोक सभा और शवयात्रा में कई प्रमुख लोगों ने अंतिम विदाई दी। इनमें महासंघ के जिला अध्यक्ष ओमप्रकाश कुमार, डॉ. सुरेंद्र सिंह, दीनानाथ सिंह, दीपक कुमार रज्जक, नागेंद्र राम, भाकपा-माले के नगर सचिव ओमप्रकाश, माले नेता वीरेंद्र सिंह, मुखिया राजदेव सिंह, जितेंद्र पासवान, पूर्व जिला सचिव रामजी केशरी, उमाशंकर मिश्र, अवधेश राय, आईसा नेता अंकित सिद्धार्थ समेत बड़ी संख्या में सहयोगी, मित्र और शुभचिंतक शामिल रहे। एक वरिष्ठ कर्मचारी ने कहा, “महेंद्र जी की कमी कभी पूरी न होगी। वे हमेशा संघर्ष के साथी रहे।”
शिक्षक संघ ने जताया गहरा शोक, डॉ. सुरेंद्र कुमार सिंह बोले- मर्माहत है समाज
महेंद्र प्रसाद के निधन पर प्राथमिक शिक्षक संघ गोप गुट मूल के जिला अध्यक्ष डॉ. सुरेंद्र कुमार सिंह ने गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि उनके जाने से पूरा शिक्षक समाज मर्माहत है। महेंद्र प्रसाद शिक्षक वर्ग के भी करीबी थे, और अक्सर संघ के मुद्दों पर साथ देते थे। शोक जताने वालों में शाहिद अली, विकास कुमार, अजीत कुमार, पंकज कुमार, यादेंद्र कुमार, सुदर्शन वर्मा, राजीव कुमार, सुरेंद्र प्रताप सिंह, विपिन कुमार, इंद्रजीत वर्मा समेत कई शिक्षक शामिल रहे। डॉ. सुरेंद्र कुमार सिंह ने बताया, “महेंद्र जी का सहयोग शिक्षक आंदोलनों में अमूल्य था। उनका हंसमुख चेहरा हमेशा याद आएगा।”
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महेंद्र प्रसाद का जन्म बक्सर के एक साधारण परिवार में हुआ था। वे समाहरणालय में प्रधान लिपिक के पद पर तैनात थे, जहां पंचायत शाखा के कामकाज को कुशलता से संभालते। लेकिन उनका असली योगदान कर्मचारी महासंघ में था। गोप गुट के जिला सचिव के रूप में उन्होंने कई आंदोलनों का नेतृत्व किया, और कर्मचारियों के हक के लिए संघर्ष किया। उनके मिलनसार स्वभाव से अधिकारी भी प्रभावित रहते। एक पूर्व सहकर्मी ने याद किया, “वे कभी गुस्सा न होते। समस्या सुनते और समाधान निकालते। राज्य सम्मेलन में रात-दिन मेहनत की, सफलता का श्रेय सबको दिया।”
इस दुखद घटना ने बक्सर के कर्मचारी जगत को झकझोर दिया है। सुबह से ही उनके घर पर सांत्वना देने वालों का तांता लगा रहा। महिलाएं रो रही थीं, पुरुष चुपचाप खड़े। एक शिक्षक ने कहा, “ऐसे लोग कम होते हैं, जो सबके लिए प्रेरणा बनें।” महासंघ ने उनके निधन पर एक मिनट मौन रखने का ऐलान किया है। परिवार को सांत्वना देने वालों में जिला प्रशासन के अधिकारी भी शामिल हुए। यह क्षति न सिर्फ महासंघ की, बल्कि पूरे जिले की है। महेंद्र प्रसाद की स्मृति में भविष्य में कोई पुरस्कार या स्मारक स्थापित करने की चर्चा भी शुरू हो गई है। उनके कार्यों से प्रेरित होकर युवा कर्मचारी अब उनके पद की जिम्मेदारी संभालने को तैयार हैं। बक्सर आज एक सच्चे सेवक को खो चुका है।
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