महाराष्ट्र में बिहारियों पर अत्याचार का दावा: उद्योगपति अजय सिंह ने ठाकरे भाइयों को चेताया!

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बक्सर, बिहार – बिहार के जाने-माने उद्योगपति और भारत प्लस ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज के सीएमडी अजय सिंह ने महाराष्ट्र में बिहारी प्रवासियों के साथ हो रहे कथित अत्याचारों पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में काम करने वाले बिहारियों में भय और दहशत का माहौल है, जिसके चलते कई लोग बिहार लौटने की तैयारी कर रहे हैं। अजय सिंह ने ठाकरे बंधुओं (उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे) से बिहारी प्रवासियों के योगदान को नजरअंदाज न करने की अपील की और महाराष्ट्र सरकार से बिहारियों पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

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बिहारियों में दहशत, बिहार लौटने की इच्छा

अजय सिंह ने बताया कि उन्हें महाराष्ट्र में काम करने वाले बिहारी मजदूरों, छोटे व्यापारियों, और ऑटो-रिक्शा चालकों से लगातार फोन आ रहे हैं। ये लोग महाराष्ट्र में असुरक्षा और हिंसा की शिकायत कर रहे हैं और बिहार में रोजगार या नौकरी के लिए मदद मांग रहे हैं। सिंह ने कहा, “महाराष्ट्र में बिहारी भाइयों में डर का माहौल है। लोग अपनी जान और रोजगार को लेकर चिंतित हैं। कई लोग बिहार लौटना चाहते हैं और मुझसे रोजगार के लिए मदद मांग रहे हैं।”

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सिंह ने जोर देकर कहा कि बिहारियों ने अपनी मेहनत और ईमानदारी से महाराष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा, “महाराष्ट्र की फैक्ट्रियों, सड़कों, और इमारतों में बिहारी मजदूरों का पसीना बहा है। अगर बिहारी मजदूर काम बंद कर दें, तो महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था ठप हो जाएगी।” उन्होंने ठाकरे बंधुओं से अपील की कि वे बिहारियों और अन्य हिंदी भाषी लोगों के योगदान को सम्मान दें।

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ठाकरे बंधुओं को चेतावनी और माफी की मांग

अजय सिंह ने उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे पर देश को भाषा और क्षेत्र के आधार पर बांटने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “ठाकरे भाइयों को बिहारियों के योगदान को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। देश को भाषाओं और क्षेत्रों में बांटने की उनकी कोशिश शर्मनाक और खतरनाक है। उन्हें इसके लिए देश से माफी मांगनी चाहिए।”

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सिंह ने यह भी ऐलान किया कि वे महाराष्ट्र में बिहारियों पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ FIR दर्ज करेंगे। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार से मांग की कि बिहारी मजदूरों, व्यापारियों, और ऑटो-रिक्शा चालकों पर हो रही हिंसा और भेदभाव के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए।

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सोशल मीडिया पर चर्चा और सियासी तनाव

महाराष्ट्र में बिहारी प्रवासियों के खिलाफ कथित अत्याचार की खबरें हाल के दिनों में सोशल मीडिया, खासकर X पर, व्यापक रूप से चर्चा में हैं। कई यूजर्स ने दावा किया है कि बिहारी मजदूरों को पीटा जा रहा है, छोटे व्यापारियों की दुकानें तोड़ी जा रही हैं, और हिंदी बोलने वालों को गालियां और हिंसा का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, ये दावे अभी तक स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुए हैं।

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ये मुद्दा बिहार में सियासी रंग ले चुका है, खासकर बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले। विपक्षी नेता, जैसे RJD के तेजस्वी यादव, ने इसे केंद्र और महाराष्ट्र की BJP सरकार की विफलता बताया है। तेजस्वी ने कहा, “महाराष्ट्र में बिहारियों पर हमले NDA की सांप्रदायिक और क्षेत्रवादी नीतियों का नतीजा हैं। बिहार की जनता इसे बर्दाश्त नहीं करेगी।”

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अजय सिंह: बिहार के गौरवशाली उद्योगपति

अजय सिंह, भारत प्लस ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज के सीएमडी, बिहार, झारखंड, और महाराष्ट्र में अपने कारोबार के लिए जाने जाते हैं। मुंबई में लंबे समय तक संघर्ष करने के बाद उन्होंने उद्योग और समाजसेवा के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई। बिहार के बक्सर जिले से ताल्लुक रखने वाले सिंह ने हमेशा बिहारी प्रवासियों के हितों की वकालत की है। उनके इस बयान ने बिहार और महाराष्ट्र के बीच तनाव को और गहरा कर दिया है, और यह मुद्दा बिहार विधानसभा चुनाव में एक बड़ा सियासी हथियार बन सकता है।

बिहारियों का महाराष्ट्र में योगदान

बिहारी प्रवासी लंबे समय से महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। मुंबई, पुणे, और नासिक जैसे शहरों में बिहारी मजदूर निर्माण, परिवहन, और छोटे व्यापार जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं। अनुमान के अनुसार, महाराष्ट्र में करीब 20 लाख बिहारी प्रवासी काम करते हैं, जो वहां की फैक्ट्रियों, रियल एस्टेट, और सेवा क्षेत्र में योगदान देते हैं। अजय सिंह ने कहा, “बिहारियों की मेहनत ने मुंबई को आर्थिक राजधानी बनाया है। उनकी मेहनत और ईमानदारी को कोई नकार नहीं सकता।”

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बिहारियों के लिए न्याय की मांग

अजय सिंह का यह बयान बिहार और महाराष्ट्र के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाता है। महाराष्ट्र में बिहारी प्रवासियों के साथ हो रहे कथित अत्याचारों ने बिहार में आक्रोश पैदा किया है, और यह मुद्दा विधानसभा चुनाव से पहले सियासी रूप ले रहा है। सिंह की मांग और ठाकरे बंधुओं को दी गई चेतावनी ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया है।

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महाराष्ट्र सरकार और केंद्र सरकार पर अब दबाव है कि वे बिहारी प्रवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करें और हिंसा की इन कथित घटनाओं की जांच करें। बिहार की जनता और प्रवासी समुदाय की नजर अब इस बात पर टिकी है कि इस मुद्दे पर क्या कार्रवाई होती है और क्या बिहारियों को महाराष्ट्र में सम्मान और सुरक्षा मिलेगी।

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