नई दिल्ली/बक्सर, 10 दिसंबर 2025: संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान आज लोकसभा में बिहार के बक्सर जिले के रेलवे स्टेशन के विकास कार्यों में हो रही देरी का गंभीर मुद्दा उठाया गया। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत बनाए जाने वाले बक्सर स्टेशन पर काम की धीमी गति को लेकर सांसद ने सदन में अपनी आवाज बुलंद की। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि घोषणा के कई वर्ष बीत जाने के बावजूद बक्सर के यात्रियों को स्टेशन पर पीने के पानी, प्रतीक्षालय, साफ-सफाई और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नसीब नहीं हो पा रही हैं। इस मुद्दे ने न सिर्फ स्थानीय लोगों का ध्यान खींचा है, बल्कि पूरे क्षेत्र में विकास की उम्मीदों को झकझोर दिया है।
अमृत भारत स्टेशन योजना की शुरुआत दिसंबर 2022 में हुई थी, जिसके तहत देशभर के 1300 से अधिक स्टेशनों को आधुनिक रूप देने का लक्ष्य रखा गया। बक्सर स्टेशन भी इस सूची में शामिल है। योजना का शिलान्यास स्वयं माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने 6 अगस्त 2023 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए किया था। उस समय बक्सर के लोगों में उत्साह की लहर दौड़ गई थी। सबको लग रहा था कि जल्द ही उनका स्टेशन विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस हो जाएगा—जैसे कि विस्तृत कंकोर्स, लिफ्ट, एस्केलेटर, वेटिंग रूम, वाणिज्यिक क्षेत्र और स्थानीय वास्तुकला से सजे प्लेटफॉर्म। लेकिन दो वर्ष बाद भी जमीनी स्तर पर ज्यादा बदलाव नजर नहीं आ रहा। सांसद ने सदन में कहा, “जनता को उम्मीद थी कि बक्सर का रेलवे स्टेशन शीघ्र तैयार होगा, लेकिन वास्तविकता कड़वी है। आज भी यात्री बुनियादी जरूरतों के लिए तरस रहे हैं।”

बक्सर स्टेशन की वर्तमान स्थिति: सुविधाओं की कमी से यात्रियों का बुरा हाल
बक्सर रेलवे स्टेशन बिहार का एक महत्वपूर्ण जंक्शन है, जहां प्रतिदिन सैकड़ों ट्रेनें गुजरती हैं और हजारों यात्री चढ़ते-उतरते हैं। यह पटना, प्रयागराज और कोलकाता जैसे शहरों को जोड़ता है। लेकिन स्टेशन की हालत देखकर कोई भी निराश हो जाए। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, यहां नौ स्टेशन मास्टर के पद स्वीकृत हैं, लेकिन केवल चार ही भरे हुए हैं। स्टाफ की कमी से टिकट काउंटर पर लंबी कतारें लगती हैं, और सुरक्षा व्यवस्था कमजोर हो जाती है। यात्रियों का कहना है कि गर्मी के दिनों में छाया की कमी से प्लेटफॉर्म पर खड़े होना मुश्किल हो जाता है। पीने के पानी की टंकियां अक्सर खाली पड़ी रहती हैं, और शौचालयों की सफाई का अभाव बीमारियों को न्योता दे रहा है।
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एक स्थानीय व्यापारी रामेश्वर प्रसाद बताते हैं, “मैं रोज स्टेशन पर आता-जाता हूं। प्रतीक्षालय में बैठने लायक जगह नहीं, न ही रोशनी की ठीक व्यवस्था। अमृत भारत योजना का नाम तो सुना है, लेकिन यहां तो पुरानी हालत ही बनी हुई है।” इसी तरह, एक महिला यात्री ने शिकायत की कि लिफ्ट और एस्केलेटर का वादा किया गया था, लेकिन बुजुर्गों और बच्चों के लिए सीढ़ियां ही चढ़नी पड़ रही हैं। स्टेशन पर पार्किंग की कमी से वाहनों का जमावाड़ा लग जाता है, जो दुर्घटनाओं का कारण बन रहा है। इन समस्याओं ने यात्रियों का सब्र तोड़ दिया है, और वे अब प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
बक्सर का गौरवशाली इतिहास: विकास का हकदार, उपेक्षा का नहीं
बक्सर कोई साधारण जगह नहीं है। यह महर्षि विश्वामित्र जी की तपोभूमि है, जहां उन्होंने कठोर तपस्या की थी। साथ ही, यह प्रभु श्रीराम जी की शिक्षा स्थली के रूप में जाना जाता है। रामायण में वर्णित कथाओं से जुड़ी यह भूमि इतिहास, आस्था और संस्कृति से परिपूर्ण है। 1764 में यहां हुए ऐतिहासिक प्लासी युद्ध ने भी भारत के इतिहास को नई दिशा दी थी। ऐसे में, बक्सर का रेलवे स्टेशन न सिर्फ यात्रियों का केंद्र है, बल्कि पर्यटकों और तीर्थयात्रियों का भी द्वार। लेकिन विकास कार्यों की देरी से इस गौरवशाली क्षेत्र की उपेक्षा हो रही है। सांसद ने सदन में जोर देकर कहा, “बक्सर विकास का हकदार है, उपेक्षा का नहीं। इतिहास और संस्कृति से लबरेज इस क्षेत्र को आधुनिक सुविधाएं मिलनी चाहिए, ताकि पर्यटन बढ़े और अर्थव्यवस्था मजबूत हो।”

अमृत भारत योजना का उद्देश्य ही स्टेशनों को स्थानीय संस्कृति से जोड़ना है। बक्सर में रामेश्वरनाथ मंदिर और घाट जैसे स्थलों को ध्यान में रखते हुए स्टेशन का डिजाइन तैयार किया गया था। लेकिन कार्य की धीमी गति से यह सपना अधर में लटका हुआ है। रेल मंत्रालय के अनुसार, बिहार में 49 स्टेशन इस योजना के तहत चुने गए हैं, जिनमें बक्सर भी शामिल है। फिर भी, जमीनी स्तर पर प्रगति निराशाजनक है। विशेषज्ञों का मानना है कि भूमि अधिग्रहण, फंडिंग और ठेकेदारी की समस्याएं मुख्य बाधाएं हैं। लेकिन यात्रियों का सवाल वही है—कब तक इंतजार?

सांसद की लड़ाई जारी: जनता के अधिकारों के लिए आवाज बुलंद
सांसद ने सदन में स्पष्ट कहा कि वे बक्सर के लोगों के अधिकारों, बुनियादी सुविधाओं और जिले के गौरव के लिए लगातार आवाज उठाते रहेंगे। उन्होंने रेल मंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की, ताकि कार्य तेजी से पूरा हो। यह मुद्दा उठाने से लोकसभा में विपक्ष और सत्तापक्ष के सदस्यों ने भी चर्चा की, और बिहार के अन्य स्टेशनों की स्थिति पर भी सवाल उठे। बक्सर के लोग सांसद के इस कदम की सराहना कर रहे हैं।
यह मुद्दा न सिर्फ बक्सर तक सीमित है, बल्कि पूरे बिहार के ग्रामीण इलाकों में रेल सुविधाओं की बदहाली को उजागर करता है। अमृत भारत योजना जैसे महत्वाकांक्षी कार्यक्रमों से देश का रेल नेटवर्क मजबूत होगा, लेकिन देरी से जनता का भरोसा डगमगाता है। सांसद ने अंत में कहा, “आप सबका सहयोग और आशीर्वाद बना रहे।” बक्सर के निवासी अब सांस रोककर इंतजार कर रहे हैं कि उनकी पुकार सुनी जाए और स्टेशन का सपना साकार हो। यह संघर्ष जारी रहेगा, क्योंकि बुनियादी सुविधाएं हर नागरिक का अधिकार हैं।
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