कैमूर में रामपुर किसान महासम्मेलन ने सोमवार को भभुआ विधानसभा के रामपुर में हलचल मचा दी। इस आयोजन में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेताओं ने सरकार की किसान विरोधी नीतियों पर जमकर निशाना साधा। करमचट डैम और पंप कैनाल की खामियों, बिजली संकट, और डीएपी खाद की कमी जैसे मुद्दों को उठाया गया। नेताओं ने सरकार को चेतावनी दी कि अगर खेतों तक पानी नहीं पहुंचाया गया, तो किसान खुद कदम उठाएंगे।

कैमूर में रामपुर किसान महासम्मेलन: आयोजन का उद्देश्य
रामपुर में आयोजित इस कैमूर में रामपुर किसान महासम्मेलन का मकसद किसानों की समस्याओं को सामने लाना था। आरजेडी कार्यकर्ताओं ने SDO से अनुमति मांगी, लेकिन शर्त लगाई गई कि राजनीतिक बात नहीं होगी। नेताओं ने इसे लोकतंत्र पर हमला करार देते हुए खुला मंच बनाया। सभा में सैकड़ों किसानों ने हिस्सा लिया और अपनी आवाज बुलंद की।

करमचट डैम: वादों का खोखलापन
नेताओं ने करमचट डैम को सरकार की नाकामी का प्रतीक बताया।
- दावा: हज़ारों करोड़ रुपये खर्च हुए, लेकिन डैम से खेतों तक पानी नहीं पहुंच रहा।
- आरोप: यह ‘हाथी के दांत’ जैसा साबित हुआ—दिखाने के लिए कुछ, चबाने के लिए कुछ नहीं।
- प्रभाव: किसानों का कहना है कि यह परियोजना केवल कागजों पर सिमट गई है।
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पंप कैनाल और पानी की समस्या
पंप कैनाल को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए।
- हकीकत: एक किसान ने बताया कि पंप हाउस चालू होने की खबर अखबारों में छपती है, लेकिन खेत सूखे पड़े हैं।
- चेतावनी: नेताओं ने सरकार को अल्टीमेटम दिया कि अगर जल्द कदम नहीं उठाए गए, तो किसान खुद पंप शुरू करेंगे।
- सवाल: इतने बड़े स्टाफ के बावजूद पानी क्यों नहीं पहुंच रहा?
सरकार की नीतियों पर हमला
नेताओं ने कई मुद्दों पर सरकार को घेरा।
- बिजली: कानूनन 8 घंटे बिजली का प्रावधान, लेकिन 4 घंटे भी नहीं मिलते। स्मार्ट मीटर से लूट का आरोप।
- खाद: डीएपी की कमी और प्राइवेट डीलरों पर निर्भरता।
- सड़क: बनारस-कलकत्ता एक्सप्रेस वे में सर्विस रोड की कमी से किसानों को 20 किमी का चक्कर।
- मुआवजा: ज़मीन के लिए सर्किल रेट पर भुगतान, जबकि कानून बाजार रेट की मांग करता है।

लोकतंत्र और मतदाता सूची विवाद
- अनुमति विवाद: SDO की शर्त को नेताओं ने लोकतंत्र पर हमला बताया और उसे ‘मानसिक रूप से असंतुलित’ करार दिया।
- संविधान: मंच से कहा गया कि सभा के लिए अनुमति की जरूरत नहीं, सिर्फ हेलिकॉप्टर लैंडिंग के लिए।
- चुनाव आयोग: मतदाता सूची से नाम काटने की साजिश और 40% निरक्षर आबादी पर निशाना।
जनता की प्रतिक्रिया और भविष्य की योजना
- गुस्सा: किसानों ने धान खरीद में रिश्वत और अन्याय की शिकायत की।
- रणनीति: 23 दिन में कार्यकर्ताओं को जागरूक करने का आह्वान।
- नेतृत्व: लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव को मजबूत नेता बताते हुए एकता का संदेश।
कैमूर में रामपुर किसान महासम्मेलन ने किसानों की लड़ाई को नई दिशा दी है। सरकार की नाकामियों और लोकतंत्र पर सवाल उठाते हुए नेताओं ने संघर्ष का रास्ता अपनाने का आह्वान किया। क्या यह आवाज़ बदलाव लाएगी? अधिक जानकारी के लिए बिहार सरकार और हमारी पॉलिटिक्स सेक्शन के साथ बने रहे।
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