आज के डिजिटल जमाने में बैंक अकाउंट आपका सबसे भरोसेमंद साथी है, लेकिन अगर आप इससे बार-बार कैश निकालते हैं तो सावधान हो जाइए। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट अब हर संदिग्ध ट्रांजेक्शन पर नजर रख रहा है। फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में कैश विड्रॉल या डिपॉजिट के नियम और सख्त हो गए हैं। अगर आपका अकाउंट में अचानक कैश का फ्लो बढ़ जाए या निकासी आपकी कमाई से ज्यादा लगे, तो बैंक सीधे टैक्स डिपार्टमेंट को रिपोर्ट कर देगा। नतीजा? एक नोटिस आपके दरवाजे पर दस्तक दे सकता है। कई लोग सोचते हैं कि सेविंग अकाउंट से पैसा निकालना बेफिक्र का काम है, लेकिन अब ऐसा नहीं। आइए, समझते हैं इन नियमों को सरल शब्दों में, ताकि आपकी जेब सुरक्षित रहे।
कैश विड्रॉल के नियम: कितना निकालें, कब लगेगा TDS?
बैंकों में कैश निकालने की कोई सख्त ऊपरी सीमा तो नहीं है, लेकिन इनकम टैक्स एक्ट की धारा 194N के तहत बड़े विड्रॉल पर टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स (TDS) लगता है। अगर आप एक फाइनेंशियल ईयर (1 अप्रैल से 31 मार्च) में एक या ज्यादा अकाउंट्स से कुल 1 करोड़ रुपये से ज्यादा कैश निकालते हैं, तो 2% TDS कटेगा। लेकिन अगर आपने पिछले तीन सालों में इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल नहीं किया है, तो सीमा और सख्त हो जाती है। पहले 20 लाख रुपये निकालने पर 2% TDS, और उसके बाद 1 करोड़ तक 2% ही, लेकिन 1 करोड़ से ऊपर 5% TDS कटेगा।
उदाहरण लीजिए, मान लीजिए आपका अकाउंट बैलेंस 50 लाख का है और आप 30 लाख निकालते हैं। अगर ITR फाइलर हैं, तो 1 करोड़ से कम होने पर कोई TDS नहीं। लेकिन नॉन-फाइलर हैं, तो 20 लाख पर ही 2% (यानी 4,000 रुपये) कट जाएगा। HDFC बैंक जैसे प्राइवेट बैंकों में मासिक फ्री विड्रॉल लिमिट 1 लाख रुपये तक है, उसके बाद हर ट्रांजेक्शन पर 150 रुपये चार्ज लग सकता है। लेकिन असली खतरा टैक्स डिपार्टमेंट का है। बार-बार बड़ी निकासी (जैसे हफ्ते में 5-10 लाख) पर बैंक SFT (स्पेसिफाइड फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन) रिपोर्ट फाइल करता है। अगर यह आपकी सैलरी या कमाई से मेल न खाए, तो नोटिस आ सकता है। एक सैलरीड व्यक्ति ने शेयर किया, “मैंने बिजनेस के लिए 15 लाख निकाले, लेकिन सोर्स न दिखा पाया तो नोटिस मिला। अब हर पैसे का बिल रखता हूं।”
कैश डिपॉजिट पर नजर: 10 लाख से ऊपर रिपोर्ट अनिवार्य
सिर्फ निकासी ही नहीं, सेविंग अकाउंट में कैश जमा करने पर भी टैक्समैन की नजर है। इनकम टैक्स एक्ट की धारा 285BA के तहत, अगर आप एक फाइनेंशियल ईयर में 10 लाख रुपये या उससे ज्यादा कैश जमा करते हैं (एक या ज्यादा बार में), तो बैंक इसे इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को रिपोर्ट करेगा। दैनिक लिमिट भी है – एक दिन में 2 लाख रुपये से ज्यादा कैश डिपॉजिट पर PAN जरूरी, वरना ट्रांजेक्शन रिजेक्ट हो सकता है। करंट अकाउंट में 50 लाख से ऊपर की रिपोर्टिंग होती है।
अगर डिपॉजिट आपकी डिक्लेयर्ड इनकम से ज्यादा लगे, तो धारा 68 के तहत इसे अनएक्सप्लेन्ड इनकम माना जा सकता है। टैक्स रेट 60% प्लस सरचार्ज और सेस! एक छोटे बिजनेसमैन ने बताया, “मैंने बिक्री से 12 लाख जमा किए, लेकिन बिल न होने से जांच हुई। अब हर रसीद क्लिक से फोटो खींचता हूं।” धारा 269ST के तहत, अगर आप 2 लाख से ज्यादा कैश एक ट्रांजेक्शन में रिसीव करते हैं (बैंक विड्रॉल को छोड़कर), तो पेनल्टी आपकी रकम के बराबर लग सकती है।
इनकम टैक्स नोटिस क्यों आता है और इसका क्या मतलब?
नोटिस का मतलब है डिपार्टमेंट को शक है कि आपका ट्रांजेक्शन आपकी कमाई से मैच नहीं कर रहा। हो सकता है कैश सोर्स ब्लैक मनी का हो या टैक्स चोरी का। अगर जवाब न दें या डॉक्यूमेंट्स न दिखाएं, तो पेनल्टी 50% से 200% तक लग सकती है, प्लस ब्याज। उदाहरण के लिए, अगर आपकी सैलरी 5 लाख सालाना है, लेकिन अकाउंट से 20 लाख निकासी हुई, तो पूछा जाएगा – पैसा कहां से आया? जवाब में सैलरी स्लिप, बिजनेस रिकॉर्ड या गिफ्ट डीड दिखानी होगी। एक रिटायर्ड व्यक्ति ने कहा, “पुरानी सेविंग्स से निकाला था, लेकिन पुराना स्टेटमेंट न होने से परेशान हुआ। अब डिजिटल रिकॉर्ड रखता हूं।”
टैक्स डिपार्टमेंट का मकसद टैक्स चोरी रोकना है, न कि ईमानदारों को परेशान करना। लेकिन डिजिटल ट्रैकिंग से हर ट्रांजेक्शन मॉनिटर होता है। 2025 में AIS (एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट) में ये डिटेल्स दिखेंगी, तो ITR फाइल करते समय मैच करें।
नोटिस से कैसे बचें: प्रैक्टिकल टिप्स जो काम आएंगे
खुशखबरी यह है कि थोड़ी सावधानी से आप नोटिस से बच सकते हैं। यहां कुछ आसान स्टेप्स:
रिकॉर्ड रखें: हर ट्रांजेक्शन का बिल, रसीद या स्टेटमेंट संभालें। डिजिटल वॉलेट जैसे Google Drive में सेव करें।
सोर्स क्लियर रखें: बड़ी रकम डिपॉजिट/विड्रॉल से पहले सोर्स (सैलरी, बिजनेस, गिफ्ट) का प्रूफ तैयार रखें। गिफ्ट पर भी 50,000 से ऊपर टैक्स लग सकता है, अगर रिश्तेदार न हो।
बैंक से सलाह लें: विड्रॉल से पहले कस्टमर केयर से लिमिट चेक करें। HDFC, SBI जैसे बैंकों में मंथली लिमिट फ्री होती है।
ITR फाइल करें: हर साल रिटर्न फाइल करने से TDS सीमा बढ़ जाती है। नॉन-फाइलर्स के लिए सख्ती ज्यादा।
डिजिटल पेमेंट चुनें: UPI या चेक से ट्रांजेक्शन करें, कैश कम यूज करें।
एक फाइनेंशियल एडवाइजर ने सलाह दी, “छोटे-छोटे ट्रांजेक्शन फैलाकर न करें, बल्कि एकमुश्त लेकिन डॉक्यूमेंटेड रखें।” अगर नोटिस आ भी जाए, तो 30 दिनों में जवाब दें – ज्यादातर केस क्लोज हो जाते हैं।
स्मार्ट बनें, टेंशन फ्री रहें
आज हर क्लिक पर नजर है, लेकिन नियमों का पालन करने से कोई डर नहीं। कैश विड्रॉल या डिपॉजिट आपकी सुविधा के लिए है, न कि मुसीबत का। 10 लाख से ऊपर डिपॉजिट या 1 करोड़ से ऊपर विड्रॉल पर सतर्क रहें, रिकॉर्ड रखें और टैक्स एडवाइजर से बात करें। इससे न सिर्फ नोटिस से बचेंगे, बल्कि फाइनेंशियल लाइफ भी स्मूथ हो जाएगी। याद रखें, ईमानदारी सबसे बड़ा बचाव है। अगर आपके पास कोई ट्रांजेक्शन स्टोरी है, तो कमेंट में शेयर करें – हम सब सीखते रहें!
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