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आईईएसएम बक्सर की मासिक मीटिंग में केशोपुर के लेफ्टिनेंट संदीप मिश्रा को किया सम्मानित, गरीबी पर दिया प्रेरक संदेश

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बक्सर, 15 दिसंबर 2025: गरीबी में जन्म लेना कोई गुनाह नहीं, लेकिन गरीबी में जीना तो गलत है। अगर दिल में कुछ करने का जज्बा और जुनून हो, तो कोई सपना नामुमकिन नहीं लगता। ये शब्द रविवार को आईईएसएम बक्सर की मासिक मीटिंग में केशोपुर ग्राम निवासी लेफ्टिनेंट संदीप मिश्रा के थे, जिन्हें उनकी मेहनत और लगन के लिए संगठन ने खास सम्मान दिया। मीटिंग में चेयरमैन डॉक्टर मेजर पी के पाण्डेय और जिलाध्यक्ष सूबेदार हरेंद्र तिवारी की अध्यक्षता में हुई, जिसका संचालन जिला उपाध्यक्ष सूबेदार विद्या सागर चौबे ने किया। जिले के हर कोने से करीब 200 पूर्व सैनिक पहुंचे, और माहौल उत्साह से गूंज उठा। संदीप मिश्रा, जो नौसेना में सिपाही से लेफ्टिनेंट बनकर चमके, उनके सम्मान पर पूरे संगठन में खुशी की लहर दौड़ गई।

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मीटिंग की शुरुआत ही प्रेरणा से भरी रही। मेजर पी के पाण्डेय और वरिष्ठ पदाधिकारियों ने संदीप मिश्रा को अंगवस्त्र और माल्यार्पण कर सम्मानित किया। संदीप ने कहा, “मैं गरीबी में पैदा हुआ, लेकिन जुनून ने मुझे नौसेना के शीर्ष पद तक पहुंचाया।” उन्होंने बक्सर वासियों को संदेश दिया कि बच्चों पर दबाव न डालें, बल्कि उन्हें कुछ बनने का समय दें। उनकी यह बात सभागार में तालियों की गड़गड़ाहट लेकर आई। इसी तरह, राजपुर ग्राम के लेफ्टिनेंट जनार्दन पांडेय ने अपने बेटे को न्यूरोलॉजिस्ट बनने पर सभी को नाश्ता कराया। उन्हें भी मेजर पी के पाण्डेय और पदाधिकारियों ने अंगवस्त्र और माल्यार्पण से नवाजा। जनार्दन ने कहा, “यह मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा दिन है, संगठन का साथ हमेशा प्रेरित करता रहता है।”

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मीटिंग में दान की भावना भी छाई रही। नायब सूबेदार श्रीकांत यादव ने अपने 3,01,070 रुपये के एरियर से 5,000 रुपये संगठन के विकास के लिए दान किए, उन्हें अंगवस्त्र से सम्मानित किया गया। नायब सूबेदार अमरेंद्र मिश्रा ने संगठन को 10 कुर्सियां भेंट कीं, और उन्हें भी सम्मान मिला। अध्यक्ष मेजर पी के पाण्डेय ने सैनिकों को मिलने वाली सुविधाओं पर विस्तार से चर्चा की। सबसे जोरदार तालियां तब गूंजीं जब उन्होंने सैनिक स्कूल के निर्माण की अपडेट दी। “युद्ध स्तर पर काम चल रहा है, नामांकन शुरू हो गया है। पढ़ाई 2027 से शुरू होगी। स्कूल इंग्लिश मीडियम होगा, सभी सुविधाएं होंगी, और मेरिट के आधार पर 25 फीसदी छात्रों को मुफ्त शिक्षा मिलेगी।” यह खबर सुनकर पूर्व सैनिकों के चेहरों पर मुस्कान आ गई।

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मीटिंग में संगठन की ताकत बढ़ाने पर जोर रहा। महासचिव कैप्टन श्रीनिवास सिंह ने अपील की कि हर सदस्य पांच नए सैनिकों को जोड़े, और साइबर सिक्योरिटी का खास ध्यान रखें। उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट आर बी ओझा ने कहा, “अपने सभी दस्तावेजों का मिलान कर लें, कोई कमी हो तो तुरंत सुधारें।” जिला उपाध्यक्ष सूबेदार विद्या सागर चौबे ने बताया कि पीसीडीए अधिकारी मनोज कुमार सिंह और लेफ्टिनेंट कामेश्वर पाण्डेय ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सीजीडीए विश्वजीत सिंह से मिलकर बक्सर में सैनिक सम्मान समारोह के लिए आमंत्रण दिया। दोनों अधिकारियों ने सकारात्मक जवाब दिया, जिस पर सभागार ‘राजनाथ सिंह जिंदाबाद, विश्वजीत सिंह जिंदाबाद’ के नारों से गूंज उठा। संगठन ने सैनिकों के वेलफेयर के लिए करीब नौ करोड़ रुपये की पेंशन और एरियर दिलाने पर उनका आभार जताया।

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मीटिंग भावुक पल भी लेकर आई। डुमराँव अनुमंडल के कसिया ग्राम के नायब सूबेदार द्वारिका प्रसाद के स्वर्गवास पर दो मिनट का मौन रखा गया। इसके बाद दस नए सैनिकों ने आईईएसएम बक्सर की सदस्यता ली। अंत में राष्ट्रगान गाया गया, और सभापति कैप्टन बी एन पाण्डेय ने मीटिंग समाप्ति की घोषणा की। मौके पर कार्यकारी चेयरमैन कैप्टन संजय पाठक, उप सभापति सूबेदार मेजर द्वारिका पाण्डेय, पूर्व चेयरमैन सूबेदार अलख नारायण श्रीवास्तव, सीता राम साहू, सूबेदार जयनेन्द्र सिंह, कैप्टन आर सी पाल, कोषाध्यक्ष सूबेदार मेजर आर बी सिंह, उप कोषाध्यक्ष सुरेन्द्र सिंह, सूबेदार योगेंद्र सिंह, सूबेदार मनोरंजन तिवारी, सूबेदार सतीश सिंह, संयोजक राम नाथ सिंह, मोहन मुरारी पाण्डेय, राजेंद्र चौबे, अशोक उपाध्याय, सूबेदार ईश्वर दयाल सिंह, सूबेदार जंग बहादुर सिंह, अम्बिका राय, लेफ्टिनेंट रमेश प्रसाद, सूबेदार मेजर शिव मुनि राय, लेफ्टिनेंट जनार्दन, तकनिकी ऑफिसर धनंजय दुबे, सूबेदार द्वारिका सिंह, सूबेदार भरत मिश्रा, एल बी राय, मीडिया प्रभारी गणेश सिंह, सूबेदार सुदामा प्रसाद, जग नारायण साहू, श्री राम सिंह, राम इकबाल सिंह, एच एन सिंह, श्री किशुन लाल, हाकिम प्रसाद, वीरांगना रिंकी देवी, कालावती देवी, माया देवी, सुशीला देवी और सैकड़ों पूर्व सैनिक मौजूद रहे।

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यह मीटिंग न केवल सम्मान का मंच बनी, बल्कि पूर्व सैनिकों के बीच एकता और प्रेरणा का प्रतीक भी। संदीप मिश्रा जैसे युवा सैनिकों की कहानी सुनकर हर कोई सोचने पर मजबूर हो गया कि मेहनत से कुछ भी हासिल किया जा सकता है। संगठन के प्रयासों से सैनिकों का कल्याण मजबूत हो रहा है, और बक्सर के पूर्व सैनिकों में नई ऊर्जा का संचार हो गया।

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