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बक्सर में ट्रेन हादसे से युवक की दर्दनाक मौत: मजदूरी के चक्कर में खोई जिंदगी, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

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बक्सर, 10 दिसंबर 2025: बिहार के बक्सर जिले में बुधवार की सुबह एक ऐसी घटना घटी, जिसने पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया। ब्रह्मपुर थाना क्षेत्र के ब्रह्मपुर गांव के रहने वाले धनराज कुमार (पिता—धर्मेंद्र कुमार मलहोत्रा) की रघुनाथपुर रेलवे स्टेशन के पास ट्रेन से गिरकर मौत हो गई। रोजाना की तरह दानापुर मजदूरी करने जा रहे धनराज का यह सफर आखिरी साबित हुआ। घटना की खबर फैलते ही गांव में शोक की लहर दौड़ गई, और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।

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प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, धनराज सुबह-सुबह ट्रेन पकड़ने के लिए स्टेशन पहुंचे थे। लेकिन ट्रेन में चढ़ते समय अचानक पैर फिसल गया, और वे चलती ट्रेन के नीचे गिर पड़े। चीखें गूंज उठीं, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। आसपास के लोग दौड़े, लेकिन गंभीर चोटों के कारण धनराज की सांसें उखड़ने लगीं। स्थानीय लोगों और सहकर्मियों ने उन्हें तुरंत रघुनाथपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पहुंचाया। वहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने स्थिति को देखते हुए आरा सदर अस्पताल रेफर कर दिया। लेकिन रास्ते में ही इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। यह खबर सुनकर परिवार वाले टूट गए।

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परिवार का इकलौता सहारा था धनराज, अब घर में मातम का सन्नाटा

धनराज दो भाई और एक बहन में सबसे बड़े थे। उनके परिवार में मां कुसुम देवी, छोटा भाई किशन कुमार और बहन शीतल कुमारी हैं। बताते हैं कि धनराज ही घर का मुख्य कमाने वाला था। मजदूरी से जो कमाते, उसी से परिवार का गुजारा चलता था। पिता धर्मेंद्र कुमार मलहोत्रा की आर्थिक स्थिति पहले से कमजोर होने के कारण धनराज ने कम उम्र में ही जिम्मेदारियां संभाल ली थीं। उनकी अचानक मौत से घर में कोहराम मच गया। मां कुसुम देवी फूट-फूटकर रो रही हैं, तो भाई-बहन सदमे में हैं। भावुक परिवार ने शव का पोस्टमार्टम कराने से साफ इनकार कर दिया। अंतिम संस्कार के लिए शव को सीधे गांव लाया गया, जहां ग्रामीणों ने उन्हें विदाई दी। गांव के लोग कहते हैं, “धनराज एक मेहनती और खुशमिजाज लड़का था। उसकी हंसी घर की रौनक थी, अब सब कुछ सूना हो गया।”

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भीड़भाड़ वाली ट्रेनें बन रहीं खतरा, ग्रामीणों ने की सुरक्षा की मांग

स्थानीय लोगों का कहना है कि ट्रेनों में अत्यधिक भीड़ होने की वजह से ऐसे हादसे आम हो गए हैं। रघुनाथपुर स्टेशन पर प्लेटफॉर्म की कमी और ट्रेनों के समय पर न आने से लोग खड़ी ट्रेनों में चढ़ने को मजबूर हो जाते हैं। एक ग्रामीण ने बताया, “हर रोज सैकड़ों मजदूर दानापुर या पटना जाते हैं। लेकिन सुरक्षा के नाम पर कुछ नहीं। अगर फुट ओवर ब्रिज या बेहतर लाइटिंग होती, तो शायद यह हादसा न होता।” ब्रह्मपुर थाने की पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है। प्रारंभिक पूछताछ में भीड़ और फिसलन भरी जमीन को हादसे का कारण बताया जा रहा है। लेकिन ग्रामीणों ने रेलवे प्रशासन और जिला अधिकारियों से स्टेशन पर सीसीटीवी कैमरे लगाने, ट्रेनों में भीड़ नियंत्रण और मजदूरों के लिए विशेष कोच चलाने की मांग की है। उनका कहना है, “एक जिंदगी गई, लेकिन सैकड़ों परिवारों का भविष्य दांव पर है। समय रहते कदम उठाओ, वरना ऐसे हादसे रुकेंगे नहीं।”

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यह घटना बक्सर के ग्रामीण इलाकों में रेल यात्रा की असुरक्षा को उजागर करती है। धनराज की मौत न सिर्फ एक परिवार का दर्द है, बल्कि उन हजारों मजदूरों की कहानी जो रोज जोखिम में जिंदगी बिताते हैं। प्रशासन को अब सोचना होगा कि मेहनतकशों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए। बक्सर जिला प्रशासन ने शोक संदेश जारी कर परिवार को हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है। लेकिन सवाल वही है—क्या यह आश्वासन कागजी रहेगा, या वाकई बदलाव आएगा? धनराज की यादें गांव में बसी रहेंगी, लेकिन उनकी मौत एक सबक बननी चाहिए।

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