उत्तर भारत में पराली जलाने का नया पैटर्न: किसान शाम को आग लगा रहे हैं, सैटेलाइट से बच निकल रही हैं घटनाएं
उत्तर भारत में पराली जलाने का पैटर्न बदल रहा है, जहां किसान अब दोपहर की बजाय शाम को आग लगा रहे हैं। इससे कई घटनाएं नासा के सैटेलाइट जैसे MODIS से बच जाती हैं। वैज्ञानिक हिरेन जेठवा के अनुसार, शाम 4-6 बजे का समय चुना जा रहा है। दक्षिण कोरिया के GEO-KOMPSAT-2A सैटेलाइट ने इस बदलाव को उजागर किया, जो हर 10 मिनट में डेटा लेता है। ISRO और iForest के अध्ययन से पता चला कि 2020 से 2024 तक पीक टाइम दोपहर 1:30 से शाम 5 बजे शिफ्ट हुआ। 2025 में घटनाएं मध्यम रहीं, लेकिन दिल्ली में AQI 400-500 पार पहुंचा, जिससे स्कूल बंद और निर्माण रुके। शाम की आग ज्यादा खतरनाक क्योंकि रात में प्रदूषण फंस जाता है। पराली का योगदान 20-30% औसतन, लेकिन एक दिन 40-70% तक। किसान स्थानीय कार्रवाई से बचने को समय बदल रहे, जिससे सैटेलाइट डेटा और हकीकत में फर्क बढ़ा। यह बदलाव प्रदूषण नियंत्रण को मुश्किल बना रहा है।


