बक्सर जिले में न्यायिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए स्थायी लोक अदालत की स्थापना की गई है। इस अदालत के अध्यक्ष के रूप में प्रवीण कुमार सिंह को नियुक्त किया गया है, जबकि माधव राय और सुनील कुमार सिन्हा सदस्य के रूप में अपनी सेवाएं देंगे। विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की धारा 22-बी के तहत स्थापित यह अदालत जन उपयोगी सेवाओं से जुड़े विवादों को त्वरित और सुलभ तरीके से सुलझाने के लिए बनाई गई है।

बक्सर में स्थायी लोक अदालत की स्थापना
बक्सर जिले में स्थायी लोक अदालत का गठन एक ऐतिहासिक कदम है, जो आम लोगों को जन उपयोगी सेवाओं से जुड़े विवादों का तेज और किफायती समाधान प्रदान करेगा। इस अदालत का उद्घाटन 6 जून 2025 को हुआ, जिसके अध्यक्ष प्रवीण कुमार सिंह हैं। उनके साथ माधव राय और सुनील कुमार सिन्हा सदस्य के रूप में कार्य करेंगे। यह अदालत विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की धारा 22-बी के तहत स्थापित की गई है, जो सार्वजनिक उपयोगिता सेवाओं के विवादों को मुकदमेबाजी से पहले सुलझाने के लिए एक स्थायी मंच प्रदान करती है। बक्सर में न्यायिक पहुंच बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।
अध्यक्ष और सदस्य: प्रवीण कुमार सिंह की अगुवाई
स्थायी लोक अदालत की संरचना में एक अध्यक्ष और दो सदस्य शामिल हैं:
- अध्यक्ष: प्रवीण कुमार सिंह, जो जिला न्यायाधीश या उच्चतर न्यायिक पद का अनुभव रखते हैं, इस अदालत की अगुवाई करेंगे। उनकी नियुक्ति उनकी विधिक विशेषज्ञता और जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता के आधार पर की गई है।
- सदस्य: माधव राय और सुनील कुमार सिन्हा, जो सार्वजनिक उपयोगी सेवाओं में पर्याप्त अनुभव रखते हैं, पक्ष को सन 2002 में केंद्र सरकार या राज्य सरकार द्वारा नामित किए गए हैं। यह संयुक्त रचना सुनिश्चित करती है कि विवादों का समाधान निष्पक्ष और विशेषज्ञता के साथ हो। ऐसी नियुक्तियाँ स्थायी लोक अदालतों की विश्वसनीयता को बढ़ाती हैं।
जन उपयोगी सेवाएँ: कौन से विवाद सुलझाए जाएंगे?
स्थायी लोक अदालत बक्सर निम्नलिखित जन उपयोगी सेवाओं से जुड़े विवादों का समाधान करेगी:
- परिवहन: हवाई, सड़क, या जलमार्ग से यात्री या सामान ढोने वाली सेवाएँ।
- डाक और संचार: डाक, टेलीफोन, और टेलीग्राफ सेवाएँ।
- बिजली और पानी: बिजली आपूर्ति, जल आपूर्ति, और स्वच्छता सेवाएँ।
- स्वास्थ्य: अस्पताल, डिस्पेंसरी, और अन्य स्वास्थ्य सेवाएँ।
- बीमा: बीमा सेवाओं से संबंधित शिकायतें।
- अन्य: सरकार द्वारा अधिसूचित कोई भी जनहित सेवा।
यह अदालत 1 करोड़ रुपये तक के वित्तीय विवादों की सुनवाई कर सकती है, बशर्ते मामला गैर-आपराधिक हो। विजन आईएएस ने बताया कि ऐसी अदालतें परिवहन और बिजली जैसे क्षेत्रों में आम लोगों की शिकायतों को प्रभावी ढंग से निपटाती हैं।
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कामकाज की विशेषताएँ: तेज और लचीली प्रक्रिया
स्थायी लोक अदालत की कार्यवाही पारंपरिक अदालतों से अलग है:
- मुकदमे से पहले समझौता: यह अदालत विवाद को अदालत तक पहुंचने से पहले सुलह के जरिए सुलझाने का अनिवार्य मंच प्रदान करती है। पक्षकारों को लिखित बयान और दस्तावेज जमा करने का निर्देश दिया जाता है।
- लचीली प्रक्रिया: विवाद की प्रकृति, पक्षों की इच्छाओं, और त्वरित न्याय के सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए मौखिक बयानों और सरल प्रक्रियाओं का उपयोग होता है।
- कोई कोर्ट फीस नहीं: कोई न्यायालय शुल्क नहीं लगता, और यदि पहले शुल्क जमा किया गया हो, तो समझौते पर राशि वापस की जा सकती है।
- सुलह या निर्णय: यदि पक्षकार सहमति तक नहीं पहुंचते, तो अदालत गुण-अवगुण के आधार पर निर्णय ले सकती है, जो गैर-आपराधिक मामलों में अंतिम होता है।
यह प्रक्रिया न केवल तेज है, बल्कि आम लोगों के लिए सुलभ भी है। दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के अनुसार, ऐसी अदालतें सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के तहत सिविल कोर्ट की शक्तियों का उपयोग करती हैं।
निर्णय की बाध्यता: अंतिम और गैर-अपील योग्य
- अंतिम और बाध्यकारी: स्थायी लोक अदालत का निर्णय, चाहे समझौते पर आधारित हो या गुण-अवगुण पर, अंतिम और सभी पक्षों पर बाध्यकारी होता है। यह सिविल कोर्ट की डिक्री के समान माना जाता है।
- कोई अपील नहीं: इसके फैसले के खिलाफ किसी भी अदालत में अपील नहीं की जा सकती, जिससे विवादों का त्वरित निपटारा सुनिश्चित होता है।
- निष्पादन: निर्णय को लागू करने के लिए इसे क्षेत्रीय अधिकारिता वाले न्यायालय में भेजा जा सकता है, जो इसे अपनी डिक्री की तरह लागू करता है।
डृष्टि ज्यूडिशियरी ने इस बाध्यकारी प्रकृति को स्थायी लोक अदालतों की ताकत बताया, जो मुकदमेबाजी को कम करती है।
- बक्सर के लिए महत्व: स्थानीय प्रभाव
- स्थायी लोक अदालत बक्सर के गठन से स्थानीय स्तर पर कई लाभ होंगे:
- त्वरित न्याय: बिजली बिल, पानी की आपूर्ति, या बीमा दावों जैसे रोजमर्रा के विवाद अब जल्दी सुलझेंगे।
- किफायती समाधान: कोई कोर्ट फीस न होने से गरीब और कमजोर वर्गों को भी न्याय मिलेगा।
- अदालतों पर बोझ कम: यह पारंपरिक अदालतों पर छोटे-मोटे विवादों का दबाव कम करेगा।
- जागरूकता और पहुंच: बक्सर के ग्रामीण क्षेत्रों में विधिक जागरूकता बढ़ेगी, और लोग अपनी शिकायतें बिना डर के दर्ज कर सकेंगे।
स्थानीय लोगों ने इस पहल का स्वागत किया है, खासकर वे जो लंबी अदालती प्रक्रियाओं से बचना चाहते हैं।

कानूनी आधार: विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम
स्थायी लोक अदालत की स्थापना विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की धारा 22-बी के तहत हुई है, जिसे 2002 में संशोधित किया गया था। इस अधिनियम की प्रमुख विशेषताएँ:
- जन उपयोगी सेवाओं के विवादों के लिए स्थायी निकायों का गठन।
- सिविल कोर्ट की शक्तियों के साथ सुलह और निर्णय की प्रक्रिया।
- समाज के कमजोर वर्गों को मुफ्त विधिक सहायता, जैसा कि संविधान के अनुच्छेद 39A में उल्लिखित है।
डृष्टि आईएएस के अनुसार, यह अधिनियम वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) को बढ़ावा देता है, जो भारतीय न्यायिक प्रणाली का पूरक है।
स्थायी लोक अदालत बक्सर 2025 की स्थापना बक्सर के लिए एक नई उम्मीद है। प्रवीण कुमार सिंह की अगुवाई में यह अदालत जन उपयोगी सेवाओं से जुड़े विवादों को तेज, किफायती, और सुलभ तरीके से सुलझाएगी। यह न केवल आम लोगों को त्वरित न्याय प्रदान करेगी, बल्कि बक्सर की न्यायिक व्यवस्था को भी मजबूत करेगी। बक्सर के निवासियों से अपील है कि वे इस अदालत का उपयोग करें और अपने अधिकारों को सुनिश्चित करें।
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