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बक्सर के सिमरी में दुर्लभ साइक्लोपिया विकार से पीड़ित नवजात का जन्म, उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर

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बक्सर (सिमरी), 6 दिसंबर 2025: सिमरी प्रखंड के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में शुक्रवार को एक ऐसा जन्म हुआ जिसने पूरे अस्पताल को हिला कर रख दिया। राजपुर पंचायत के त्वकलराय डेरा निवासी रवि यादव की पत्नी रिंकू देवी ने जिस बच्चे को जन्म दिया, उसमें जन्म के साथ ही गंभीर शारीरिक असामान्यता दिखी। नवजात की आंखें एक ही जगह मिली हुई थीं और नाक का उभार माथे के ऊपरी हिस्से में था। प्रसव कक्ष से लेकर पूरे स्टाफ तक हर कोई यह देखकर स्तब्ध रह गया। डॉक्टरों ने इसे साइक्लोपिया नामक अत्यंत दुर्लभ और घातक जन्मजात विकृति बताया, जो लाखों प्रसवों में कभी-कभी ही देखने को मिलती है।

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चिकित्सकों के अनुसार साइक्लोपिया होलेप्रोसेंसेफली का सबसे गंभीर रूप है। इसमें गर्भावस्था के शुरुआती दिनों में भ्रूण का अग्र-मस्तिष्क दो हिस्सों में विभाजित नहीं हो पाता, जिससे चेहरे का विकास असामान्य हो जाता है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सक डॉ. प्रेम चंद्र प्रसाद ने बताया कि जन्म के तुरंत बाद बच्चे की हालत देखकर उसे तत्काल उच्च स्तरीय चिकित्सा केंद्र रेफर कर दिया गया। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. निशा ओझा ने पुष्टि करते हुए कहा कि यह साइक्लोपिया का स्पष्ट मामला है। उन्होंने बताया कि इस विकार के पीछे आनुवंशिक कारण, गर्भावस्था में संक्रमण, विषैले तत्वों का प्रभाव या प्लेसेंटा की समस्या हो सकती है।

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अस्पताल प्रशासन ने मामले को बेहद संवेदनशील मानते हुए शिशु को तुरंत उच्च चिकित्सा केंद्र भेज दिया। स्वास्थ्य विभाग ने भी इसकी औपचारिक रिपोर्टिंग शुरू कर दी है। सिमरी स्वास्थ्य केंद्र में तैनात नर्सिंग स्टाफ ने बताया कि प्रसव के समय सब कुछ सामान्य था, लेकिन बच्चे को देखते ही सबकी सांसें थम गईं। एक नर्स ने बताया, “हमने कितने ही प्रसव कराए हैं, लेकिन ऐसा पहली बार देखा। सबकी आंखें नम हो गईं।” बच्चे के पिता रवि यादव और परिवार के लोग इस सदमे से उबर नहीं पा रहे हैं। अस्पताल ने परिवार को हर संभव मदद का भरोसा दिया है।

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साइक्लोपिया दुनिया भर में बेहद दुर्लभ माना जाता है। डॉक्टरों के अनुसार ऐसे बच्चे जन्म के कुछ घंटों या दिनों तक ही जीवित रह पाते हैं। यह विकार ग्रीक पौराणिक कथाओं के एक आंख वाले राक्षस साइक्लोप्स से मिलता-जुलता है, इसलिए इसका नाम साइक्लोपिया पड़ा। डॉ. निशा ओझा ने बताया कि गर्भावस्था में अल्ट्रासाउंड से भी कई बार यह पता नहीं चल पाता, क्योंकि शुरुआती महीनों में भ्रूण का विकास बहुत तेजी से होता है। उन्होंने गर्भवती महिलाओं से नियमित जांच और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की सलाह दी।

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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सक डॉ. प्रेम चंद्र प्रसाद ने कहा कि बच्चे को देखते ही हमने फौरन उच्च केंद्र रेफर करने का फैसला लिया। वहां विशेषज्ञों की टीम बेहतर तरीके से देखभाल कर सकेगी। उन्होंने बताया कि अस्पताल में इस तरह के मामले पहले कभी नहीं आए। पूरे स्टाफ ने परिवार के साथ संवेदना व्यक्त की और हर संभव मदद का आश्वासन दिया। क्षेत्र में यह खबर फैलते ही लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई है। कई लोग अस्पताल पहुंचकर परिवार से मिलने और हालचाल जानने की कोशिश कर रहे हैं।

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परिवार अभी सदमे में है। रवि यादव ने बताया कि सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन अचानक यह देखकर सब टूट गए। वे बच्चे के लिए दुआ कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी मामले पर नजर रखे हुए हैं। इस दुर्लभ जन्म ने एक बार फिर गर्भावस्था में नियमित जांच और जागरूकता की जरूरत को रेखांकित किया है। उम्मीद की जा रही है कि उच्च चिकित्सा केंद्र में बच्चे को हर संभव मदद मिलेगी।

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