बक्सर, 6 दिसंबर 2025: बक्सर नगर इलाके में सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे का मुद्दा अब गरमाता जा रहा है। स्थानीय निवासियों और सामाजिक संगठनों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि जिन जमीनों पर म्यूटेशन और निबंधन पर रोक लगी है, उन्हें सबसे पहले अतिक्रमणकारियों से मुक्त कराया जाए। साथ ही, सरकारी जमीन कब्जाकर करोड़पति बने तथाकथित व्यवसायी समाज के लोगों की सूची बक्सर नगर प्रशासन और अंचल स्तर पर सार्वजनिक तौर पर जारी की जाए। यह मांग तब और तेज हो गई है, जब हाल ही में नगर परिषद ने अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया, लेकिन कई जगहों पर बड़े व्यवसायियों के नाम सामने आने से लोग सवाल उठा रहे हैं।
बक्सर नगर में सरकारी जमीनों पर कब्जे की समस्या पुरानी है। मुनीम चौक, बड़ी मस्जिद से पीपी रोड होते भगत सिंह चौक तक कई जगहों पर दुकानें, गोदाम और निर्माण कार्य अवैध रूप से खड़े हैं। एक स्थानीय निवासी ने बताया, “हमारे मोहल्ले की सरकारी जमीन पर एक बड़ा व्यापारी ने दुकान बना ली। म्यूटेशन रुक गया है, लेकिन कब्जा आज भी है। पहले इसे साफ करो, फिर नामांतरण की बात करो।” इसी तरह, डुमरांव नगर परिषद क्षेत्र में भी अतिक्रमण हटाने का अभियान रुका हुआ है। ईओ राहुलधर दूबे ने कहा कि अतिक्रमित जमीन की मापी कर चिह्नित किया जा रहा है, लेकिन हटाने से पहले मालिकों को नोटिस दिया जाएगा।

हाल के दिनों में प्रशासन ने सख्ती दिखाई है। गुरुवार को जेसीबी मशीन देखते ही अतिक्रमणकारी भाग खड़े हुए। नगर परिषद ने बड़ी मस्जिद से भगत सिंह चौक तक बुलडोजर चलाया, जिसमें 9 दुकानदारों से 18,000 रुपये का जुर्माना वसूला गया। वाचनालय को भी अतिक्रमण मुक्त कराया गया। शुक्रवार को दूसरे दिन भी अभियान चला, और अतिक्रमणकारियों में अफरा-तफरी मच गई। लेकिन जनता का कहना है कि यह अभियान छोटे व्यापारियों पर ज्यादा केंद्रित है, जबकि बड़े व्यवसायी जो सरकारी जमीन पर करोड़ों का कारोबार चला रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई कम हो रही है। एक सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा, “ये लोग समाज कहलाने वाले हैं, लेकिन सरकारी संपत्ति पर कब्जा करके अमीर बने। उनकी सूची जारी हो, ताकि सबको पता चले।”

म्यूटेशन पर रोक का मुद्दा भी गंभीर है। बिहार सरकार के राजस्व विभाग ने निर्देश दिए हैं कि अतिक्रमण वाली जमीनों का नामांतरण तभी होगा, जब कब्जा मुक्त हो। लेकिन बक्सर में कई आवेदन लंबित हैं। एक किसान ने शिकायत की, “हमारी पैतृक जमीन का म्यूटेशन रुका है क्योंकि किनारे पर अतिक्रमण है। पहले इसे हटाओ।” प्रशासन ने कहा कि ऑनलाइन पोर्टल से शिकायत दर्ज की जा सकती है, और सीओ कोर्ट में सार्वजनिक भूमि अतिक्रमण की रिपोर्ट दी जा सकती है। डीएम ने हाल ही में मीटिंग में म्यूटेशन तेज करने और अतिक्रमण हटाने पर जोर दिया। लेकिन स्थानीय लोग चाहते हैं कि नगर प्रशासन अंचल स्तर पर सूची जारी करे, ताकि पारदर्शिता बने।
यह मांग बक्सर के विकास से जुड़ी है। सरकारी जमीन मुक्त होने से सड़कें चौड़ी होंगी, पार्क बनेंगे और गरीबों को आवास मिलेगा। एक बुजुर्ग ने कहा, “हमने देखा है कि कैसे छोटे कब्जे बड़े हो जाते हैं। अब समय है कि बड़े कब्जेदारों पर भी बुलडोजर चले।” प्रशासन ने वादा किया है कि अभियान जारी रहेगा, और शिकायतों पर कार्रवाई होगी। उम्मीद है कि जल्द ही सूची जारी हो और अतिक्रमण मुक्त बक्सर बने।
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