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बक्सर के गंगाधाम कम्हरिया में श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ भव्य रूप से संपन्न: श्रद्धालुओं ने लिया आशीर्वाद

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बक्सर, बिहार। बक्सर जिले के सदर प्रखंड अंतर्गत गंगाधाम, कम्हरिया में आयोजित श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ मंगलवार को श्रद्धा, भक्ति और आस्था के भव्य संगम के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। पांच दिवसीय इस महायज्ञ के समापन दिवस पर सुबह से ही श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। गंगा नदी के तट पर बनी यज्ञशाला में हजारों भक्त, साधु-संत और स्थानीय लोग जुटे, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूब गया।

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महायज्ञ के अंतिम दिन वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन किया गया और पूर्णाहुति दी गई। मंत्रध्वनि से पूरा इलाका गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने यज्ञशाला की परिक्रमा की और परिवार, समाज तथा राष्ट्र की सुख-शांति की कामना की। बीते पांच दिनों से चल रहे हनुमान चालीसा पाठ और हरि कीर्तन में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। भजन-कीर्तन से वातावरण भक्तिरस से भरपूर रहा।

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समापन अवसर पर परम पूज्य श्री 1008 गंगापुत्र त्रिदंडी स्वामी जी महाराज ने प्रवचन दिया। उन्होंने कहा कि यज्ञ से वातावरण शुद्ध होता है और इसमें भाग लेने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। स्वामी जी ने धर्म, सदाचार, सेवा और समाज में सकारात्मक ऊर्जा के संचार पर जोर दिया। उनके प्रवचन से श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और कई भक्तों ने उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया।

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दोपहर 12 बजे के बाद विशाल भंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें सैकड़ों साधु-संतों और हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। भंडारा देर शाम तक निर्बाध रूप से चलता रहा। श्रद्धालुओं ने आयोजन समिति की व्यवस्था, सेवा-भाव और आतिथ्य की खूब सराहना की। कार्यक्रम के अंत में स्वामी जी महाराज ने सभी साधु-संतों को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानपूर्वक विदाई दी।

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महायज्ञ के सफल समापन पर श्रद्धालुओं के चेहरों पर संतोष, शांति और गहरी आस्था की झलक साफ दिखाई दी। यह आयोजन गंगा के पवित्र तट पर होने के कारण और भी विशेष रहा। स्थानीय लोग बताते हैं कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में एकता और सकारात्मकता बढ़ाते हैं। गंगाधाम कम्हरिया बक्सर जिले के महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक है, जहां नियमित रूप से ऐसे कार्यक्रम होते रहते हैं।

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श्रद्धालुओं ने कहा कि महायज्ञ में शामिल होकर उन्हें आध्यात्मिक शांति मिली। आयोजन समिति ने सभी सहयोगियों, दानदाताओं और श्रम करने वाले स्वयंसेवकों का आभार व्यक्त किया। इस तरह के महायज्ञ स्थानीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं को मजबूत करते हैं। बक्सर में धार्मिक आयोजनों की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है, जो लोगों को एकजुट रखती है।

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