बक्सर, बिहार। बिहार के बक्सर जिले में पटना-बक्सर फोरलेन (एनएच-922) पर ट्रैफिक व्यवस्था की लगातार बिगड़ती स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। स्थानीय चालकों और यात्रियों की शिकायत है कि बड़ी गाड़ियां—जैसे ट्रक और हाइवा—अक्सर गलत लेन में घुस जाती हैं, जिससे छोटी गाड़ियों को अपने लेन में चलने में भारी दिक्कत होती है। कई बार तो छोटी गाड़ियों को गलत साइड लेना पड़ता है, जो हादसों को न्योता देता है। हाल के दिनों में इस रूट पर कई भयावह दुर्घटनाएं हुई हैं, जिनमें जानें जा चुकी हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि फोरलेन होने के बावजूद लेन मार्किंग साफ नहीं हैं और ओवरटेकिंग के नाम पर बड़ी गाड़ियां बिना संकेत दिए लेन बदल लेती हैं। एक चालक ने बताया, “छोटी कार या बाइक को तो जगह ही नहीं मिलती। ट्रक आगे से आते ही लेन काट देते हैं, तो बचने के लिए गलत साइड जाना पड़ता है।” इसी तरह, एक अन्य यात्री ने कहा कि रात के समय तो स्थिति और खराब हो जाती है, क्योंकि लाइटिंग की कमी से दृश्यता कम रहती है। ये शिकायतें सोशल मीडिया पर भी खूब उछल रही हैं, जहां लोग फोरलेन की स्थिति पर सवाल उठा रहे हैं।

हाल ही में इस फोरलेन पर कई हादसे दर्ज हुए हैं। जनवरी 2026 में एक सुबह चार लोगों की मौत हो गई, जब उनकी गाड़ी एक अन्य वाहन से टकराई। फरवरी 2026 में पटना-बक्सर रूट पर एक कार और ट्रक की आमने-सामने टक्कर से तीन लोगों की मौके पर ही जान चली गई, जबकि एक ने अस्पताल में दम तोड़ा। इसी महीने आरा-बक्सर फोरलेन पर तीन युवकों की दर्दनाक मौत हुई, जब उनकी गाड़ी अनियंत्रित हो गई। ये हादसे लेन उल्लंघन और तेज रफ्तार से जुड़े बताए जा रहे हैं। दिसंबर 2025 में भी गिट्टी लदे हाइवा और ट्रेलर की टक्कर से चालक घायल हो गया था।

पुलिस और एनएचएआई (नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया) के अधिकारियों का कहना है कि वे नियमित चेकिंग कर रहे हैं। ब्रह्मपुर थाना क्षेत्र के एक अधिकारी ने बताया कि गलत लेन चलने वालों पर चालान काटे जा रहे हैं, लेकिन ट्रैफिक वॉल्यूम ज्यादा होने से पूरी निगरानी मुश्किल है। नवंबर 2025 में बक्सर एनएच पर 15 किलोमीटर लंबा जाम लगा था, जो निरीक्षण के कारण हुआ। इसके अलावा, अप्रैल 2025 में एक टोल प्लाजा के पास कार-ट्रक टक्कर से चार लोग, जिनमें एक बच्चा शामिल था, मारे गए थे।
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सरकार की ओर से सुधार के प्रयास भी चल रहे हैं। बक्सर में नया तीन-लेन गंगा ब्रिज बन रहा है, जो ट्रैफिक जाम कम करने में मदद करेगा। इसके अलावा, एनएच-139 को चौड़ा करने के लिए 5500 करोड़ का निवेश हो रहा है, जो संकरी लेन और भारी ट्रैफिक से होने वाले हादसों को घटाएगा। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री ने बिहार में कई फोरलेन प्रोजेक्ट्स की समीक्षा की है, जिसमें पटना-गया-दोभी सेक्शन को चार लेन बनाने का काम शामिल है। स्थानीय स्तर पर सकड्डी जैसे इलाकों में सर्विस लेन, अंडरपास और हाई-मास्ट लाइट की मांग उठ रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि लेन अनुशासन सिखाने के लिए जागरूकता अभियान जरूरी हैं। ट्रैफिक पुलिस ने कहा कि कैमरा सिस्टम लगाने की योजना है, जो वाहनों की मॉनिटरिंग करेगी। बक्सर से पटना की दूरी सिर्फ 130 किलोमीटर है, लेकिन जाम और लेन की समस्या से चार घंटे लग जाते हैं। यात्रियों से अपील है कि वे सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करें—सीट बेल्ट बांधें, स्पीड लिमिट का ध्यान रखें और गलत लेन से बचें।

यह समस्या केवल बक्सर तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे बिहार में सड़क हादसों का एक बड़ा कारण है। 2025 में बिहार में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में वृद्धि देखी गई, लेकिन सरकारी प्रयासों से उम्मीद है कि स्थिति सुधरेगी। स्थानीय लोग चाहते हैं कि फोरलेन का पूरा लाभ मिले और यात्रा सुरक्षित हो। एनएचएआई ने वादा किया है कि अगले कुछ महीनों में सुधार दिखेंगे, लेकिन तब तक चालकों को सतर्क रहना होगा।
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