पटना, 8 मार्च 2026: बिहार और पश्चिम बंगाल के कुछ जिलों को मिलाकर केंद्र शासित प्रदेश बनाने की अफवाहों पर सियासी घमासान तेज हो गया है। सांसद पप्पू यादव के बयान के बाद भाजपा ने इस पर स्पष्ट सफाई दी है। पार्टी के सांसद नित्यानंद राय ने 7 मार्च को अपने एक्स हैंडल से पोस्ट कर कहा कि ऐसी कोई योजना नहीं है और पप्पू यादव के बयान को गंभीरता से न लिया जाए। यह प्रतिक्रिया बिहार की राजनीति में चल रही चर्चाओं को शांत करने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।

नित्यानंद राय ने अपने पोस्ट में लिखा कि बिहार और पश्चिम बंगाल के कुछ जिलों को मिलाकर केंद्र शासित प्रदेश बनाने की योजना पूरी तरह तथ्य से परे है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसमें कोई सच्चाई नहीं है और लोगों से अपील की कि पप्पू यादव के ट्वीट को नजरअंदाज करें। यह बयान उस समय आया जब पप्पू यादव ने 6 मार्च को एक्स पर पोस्ट किया था कि भाजपा पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लागू कर बिहार विधानसभा से प्रस्ताव पारित करवाकर सीमांचल और मालदा, मुर्शिदाबाद, रायगंज, दिनाजपुर जैसे जिलों को मिलाकर केंद्र शासित प्रदेश बनाने की तैयारी कर रही है। उन्होंने नीतीश कुमार को हटाने और लेफ्टिनेंट जनरल पृष्ठभूमि के राज्यपाल लाने को इसके पीछे का खेल बताया था।

भाजपा की इस सफाई के बाद पप्पू यादव ने पलटवार किया। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर नित्यानंद राय को संबोधित करते हुए कहा कि बिना आग के धुंआ नहीं उठता। उन्होंने गृहमंत्री की सीमांचल यात्रा, बिहार में सैनिक पृष्ठभूमि के राज्यपाल और बंगाल में आईबी के पूर्व अधिकारी को राज्यपाल बनाए जाने को संदेहास्पद बताया। पप्पू यादव ने कहा कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो अच्छी बात है, लेकिन यदि हुआ तो वे पूरी गंभीरता से लेंगे और आर्थिक नाकेबंदी करेंगे।
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इस मुद्दे पर आरजेडी ने भी पहले प्रतिक्रिया दी थी। पार्टी के प्रधान महासचिव और विधायक रणविजय साहू ने कहा था कि सीमांचल और बंगाल के कुछ हिस्सों को मिलाकर केंद्र शासित प्रदेश बनाने की तैयारी से ममता बनर्जी और उनका वोट बैंक प्रभावित होगा। हालांकि, भाजपा ने इन सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। नित्यानंद राय की पोस्ट से पार्टी ने साफ कर दिया कि ऐसी कोई योजना नहीं चल रही।

यह विवाद बिहार और पश्चिम बंगाल की सीमा क्षेत्रों में राजनीतिक संवेदनशीलता को छूता है। सीमांचल जैसे इलाकों में जातीय और क्षेत्रीय मुद्दे हमेशा गर्म रहते हैं। भाजपा की सफाई से अफवाहों पर लगाम लगने की उम्मीद है, लेकिन पप्पू यादव के पलटवार से चर्चा जारी रहेगी। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ऐसे बयान चुनावी मौसम में वोट बैंक को प्रभावित करने की कोशिश के रूप में देखे जाते हैं। फिलहाल, भाजपा ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है और लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।

बिहार की राजनीति में ऐसे मुद्दे अक्सर सुर्खियां बनते हैं। केंद्र शासित प्रदेश की बात से जुड़ी अफवाहों ने सोशल मीडिया पर भी बहस छेड़ दी है। नित्यानंद राय का पोस्ट हजारों बार शेयर हो चुका है, जबकि पप्पू यादव की पोस्ट भी वायरल हो रही है। आरजेडी की प्रतिक्रिया ने इसे और बढ़ावा दिया। आने वाले दिनों में यदि कोई आधिकारिक बयान आता है, तो स्थिति और साफ हो सकती है।
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