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बिहार पुलिस मुख्यालय में पेंशन मामलों पर एकदिवसीय कार्यशाला: डीजीपी ने दिए स्पष्ट निर्देश, सेवानिवृत्ति लाभों में पारदर्शिता पर जोर

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पटना, 10 दिसंबर 2025: सेवानिवृत्ति के बाद के जीवन को सुगम बनाने के लिए पुलिसकर्मियों की परेशानियां कम हों, यही सोचकर बिहार पुलिस मुख्यालय ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरदार पटेल भवन, पटना के सभागार में बिहार पुलिस मुख्यालय और प्रधान महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी), बिहार, पटना के संयुक्त तत्वावधान में पुलिस विभाग के पेंशन संबंधित मामलों के निष्पादन में स्पष्टता लाने के उद्देश्य से एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह आयोजन इसलिए खास था क्योंकि इसमें न सिर्फ नीतिगत बातें हुईं, बल्कि व्यावहारिक चुनौतियों पर भी गहन चर्चा हुई, जो हजारों पुलिसकर्मियों के लिए राहत की उम्मीद जगाती है।

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कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में पुलिस महानिदेशक श्री विनय कुमार उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि पेंशन प्रक्रिया में कोई अस्पष्टता नहीं रहनी चाहिए, क्योंकि यह सेवानिवृत्ति के बाद के सम्मानजनक जीवन का आधार है। श्री विनय कुमार ने जोर देकर कहा कि विभाग को यह सुनिश्चित करना होगा कि हर पुलिसकर्मी को उसके योगदान के अनुरूप लाभ समय पर मिले। उनके साथ प्रधान महालेखाकार श्री संतोष कुमार भी थे, जिन्होंने लेखा प्रक्रियाओं की बारीकियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि हाल के वर्षों में डिजिटल सिस्टम से पेंशन वितरण में तेजी आई है, लेकिन कुछ मामलों में दस्तावेजों की कमी से देरी हो जाती है। श्री संतोष कुमार ने सुझाव दिया कि संयुक्त सत्यापन प्रक्रिया को और मजबूत किया जाए, ताकि सेवानिवृत्ति के ठीक बाद पेंशन शुरू हो सके।

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कार्यशाला में अपर पुलिस महानिदेशक (संचार एवं तकनीकी सेवाएं) श्री निर्मल कुमार आजाद ने तकनीकी पहलुओं पर फोकस किया। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से पेंशन फॉर्म भरना आसान हो गया है, लेकिन ग्रामीण इलाकों के पुलिसकर्मियों को ट्रेनिंग की जरूरत है। श्री आजाद ने कार्यशाला के प्रतिभागियों को निर्देश दिए कि तकनीकी अपडेट्स पर नियमित वर्कशॉप आयोजित की जाएं। इसी तरह, अपर पुलिस महानिदेशक (बजट/अपील/कल्याण) डॉ. कमल किशोर सिंह ने बजट और अपील प्रक्रिया पर चर्चा की। डॉ. सिंह ने बताया कि कल्याण निधि से पेंशन विवादों के समाधान में मदद मिल रही है, लेकिन अपीलों का निपटारा 90 दिनों के अंदर पूरा करने का लक्ष्य रखा जाए। उनकी बातें सुनकर लगा जैसे वे खुद उन पुलिसकर्मियों की पीड़ा समझते हैं, जो वर्षों की सेवा के बाद कागजी जंजीरों में उलझ जाते हैं।

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कार्यशाला में बिहार पुलिस मुख्यालय और प्रधान महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी), बिहार के कई वरीय पदाधिकारी भी मौजूद रहे। उन्होंने विभिन्न सत्रों में भाग लिया, जहां पेंशन गणना, दस्तावेज सत्यापन, जीआरईपीएस सिस्टम का उपयोग और विवाद निपटान जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने व्याख्यान दिए। एक सत्र में प्रतिभागियों ने अपनी समस्याएं साझा कीं – जैसे पुराने रिकॉर्ड्स की कमी या पारिवारिक पेंशन में देरी। इन चर्चाओं से स्पष्ट हुआ कि संयुक्त प्रयास से ही इन मुद्दों का समाधान संभव है। कार्यशाला का समापन संकल्प के साथ हुआ, जहां सभी ने पेंशन प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता लाने का वादा किया।

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यह आयोजन बिहार पुलिस के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा। जब पुलिसकर्मी बिना चिंता के सेवा करेंगे, तभी समाज सुरक्षित रहेगा। मुख्य अतिथियों की मौजूदगी ने आयोजन को और गरिमामय बनाया, और उम्मीद है कि इससे जमीनी स्तर पर बदलाव दिखेगा। सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों के लिए यह एक सकारात्मक संदेश है कि उनका सम्मान अब पहले से बेहतर होगा।

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