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बिहार में दो नए विशेष आर्थिक जोन: कुमारबाग और नावानगर में 225 करोड़ की निवेश योजना से 10,000 नौकरियां होंगी सृजित

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पटना, 6 दिसंबर 2025: बिहार अब औद्योगिक विकास की नई ऊंचाइयों को छूने के लिए पूरी तरह तैयार हो चुका है। राज्य सरकार ने निवेशकों को आकर्षित करने के मकसद से अपने पहले दो विशेष आर्थिक जोन (एसईजेड) विकसित करने की सारी तैयारी पूरी कर ली है। कुल 250 एकड़ क्षेत्र में फैले ये जोन पश्चिमी चंपारण के कुमारबाग और बक्सर के नावानगर में बनेंगे। दोनों जगहों पर 125-125 एकड़ जमीन चिह्नित हो चुकी है, और जल्द ही निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है। यह कदम बिहार को देश के औद्योगिक मानचित्र पर मजबूत जगह दिलाने वाला साबित होगा।

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उद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल ने बताया कि केंद्र सरकार से इन दोनों एसईजेड के निर्माण की औपचारिक मंजूरी मिल चुकी है। कुमारबाग एसईजेड पर करीब 116 करोड़ और नावानगर एसईजेड पर 109 करोड़ रुपये खर्च होंगे। कुल मिलाकर 225 करोड़ की यह राशि आधुनिक बुनियादी ढांचे पर लगाई जाएगी। इसमें चौड़ी सड़कें, बिना रुकावट बिजली और पानी की आपूर्ति, उन्नत तकनीक और पूरी औद्योगिक सुविधाएं शामिल हैं। मंत्री ने कहा, “ये जोन न सिर्फ बिहार के लिए मॉडल बनेंगे, बल्कि आने वाले समय में राज्य में और एसईजेड स्थापित करने का आधार भी तैयार करेंगे। इससे स्थानीय युवाओं को अपार अवसर मिलेंगे।”

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आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे जोन, उद्यमियों के लिए आसान होगा कारोबार

ये विशेष आर्थिक जोन पूरी तरह आधुनिक और उपयोगी होंगे। यहां उद्यमियों को मशीनरी लगाने से लेकर उत्पादन शुरू करने तक हर सुविधा मिलेगी। जोन में प्लग-एंड-प्ले सिस्टम होगा, यानी तैयार औद्योगिक शेड उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके अलावा मजबूत सड़क संपर्क, 24 घंटे बिजली-पानी की गारंटी, उच्च सुरक्षा व्यवस्था और तेज इंटरनेट जैसी चीजें होंगी। उद्योग विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, इन जोनों से स्टार्टअप्स, मैन्युफैक्चरिंग, फूड प्रोसेसिंग, टेक्सटाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों की बड़ी कंपनियां आकर्षित होंगी।

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एक स्थानीय उद्यमी ने कहा, “पहले बिहार में निवेश के लिए कई बाधाएं आती थीं, लेकिन ये जोन उन सबको दूर करेंगे। यहां आकर कारोबार करना आसान और सस्ता होगा।” अनुमान है कि इन दोनों एसईजेड से सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से 10,000 से ज्यादा नौकरियां पैदा होंगी। खासकर ग्रामीण इलाकों के युवाओं को इससे फायदा होगा, जो शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर होते हैं। कुमारबाग जैसे क्षेत्र में, जहां कृषि पर निर्भरता ज्यादा है, फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स से किसानों को भी सीधा लाभ मिलेगा। इसी तरह नावानगर में इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक्सटाइल सेक्टर से स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनेगी।

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निवेशकों को मिलेंगी आकर्षक छूटें, निर्यात बढ़ेगा

भारत के विशेष आर्थिक जोन नीति के तहत मिलने वाली छूटों की तरह, बिहार सरकार भी यहां आने वाले उद्यमियों को खास सुविधाएं देगी। इनमें आयकर और राज्य करों में छूट, शुल्क-मुक्त आयात-निर्यात की व्यवस्था और सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम शामिल हैं। इससे कंपनियों को कागजी काम में देरी नहीं होगी, और वे जल्दी उत्पादन शुरू कर सकेंगी। विभाग ने बताया कि ये जोन निर्यात को बढ़ावा देने के लिए बनाए जा रहे हैं, जिससे बिहार का नाम वैश्विक बाजार में चमकेगा।

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पिछले कुछ सालों में बिहार ने निवेश सम्मेलनों के जरिए हजारों करोड़ आकर्षित किए हैं, लेकिन एसईजेड जैसी स्थायी संरचनाओं की कमी थी। अब ये दो जोन उस कमी को पूरा करेंगे। निर्माण शुरू होते ही स्थानीय ठेकेदारों और मजदूरों को भी काम मिलेगा। एक अधिकारी ने जोड़ा, “ये सिर्फ इमारतें नहीं, बल्कि बिहार के भविष्य की नींव हैं। युवा यहां स्किल्ड जॉब्स पाकर आत्मनिर्भर बनेंगे।”

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बिहार सरकार का यह प्रयास राज्य को औद्योगिक हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। कुमारबाग और नावानगर जैसे इलाकों में विकास की लहर दौड़ेगी, और दूर-दराज के गांवों तक समृद्धि पहुंचेगी। उम्मीद है कि जल्द ही इन जोनों से सफलता की कहानियां सामने आएंगी, जो अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बनेगी।


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