पटना: आम लोगों की जेब पर बढ़ते बोझ को लेकर बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। एलपीजी सिलेंडर की भारी किल्लत, पेट्रोलियम उत्पादों और बिजली की दरों में तेज वृद्धि के विरोध में कांग्रेस ने तीन दिवसीय चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान किया है।
पार्टी ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन पूरे बिहार में जनसमस्याओं को उजागर करने और सरकार से राहत की मांग करने के लिए शुरू किया जा रहा है। कांग्रेस कार्यकर्ता और नेता आम आदमी की परेशानियों को लेकर सड़कों पर उतरेंगे।

आंदोलन का कार्यक्रम
बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार:
- 31 मार्च 2026: प्रदेश प्रवक्ताओं के माध्यम से सभी जिलों में जन समस्याओं पर प्रेस वार्ता आयोजित की जाएगी। इसमें एलपीजी की कमी और महंगाई के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा होगी।
- 02 अप्रैल 2026: प्रदेश के सभी प्रखंडों में विरोध प्रदर्शन और प्रधानमंत्री का पुतला दहन किया जाएगा। कार्यकर्ता स्थानीय स्तर पर आम लोगों की आवाज उठाएंगे।
- 03 अप्रैल 2026 (दोपहर 1 बजे): राजधानी पटना में इनकम टैक्स गोलंबर पर विशेष विरोध प्रदर्शन होगा। इसमें प्रधानमंत्री का पुतला दहन भी शामिल है।
इस आंदोलन को सफल बनाने के लिए पार्टी ने सभी कांग्रेस जनों से पूर्ण सहयोग की अपील की है। बयान में कहा गया है कि जनहित में आयोजित इन कार्यक्रमों में सातियों के साथ सक्रिय भागीदारी जरूरी है। इससे केंद्र सरकार पर दबाव बनेगा और जनविरोधी नीतियों पर पुनर्विचार के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
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क्यों उठा रहा है कांग्रेस यह मुद्दा?
वर्तमान में देशभर में एलपीजी सिलेंडर की उपलब्धता पर सवाल उठ रहे हैं। कई घरों में सिलेंडर मिलने में देरी हो रही है, जिससे महिलाओं और आम परिवारों को खासा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही पेट्रोलियम उत्पादों और बिजली बिलों में बढ़ोतरी ने घरेलू खर्च को और महंगा कर दिया है।
कांग्रेस का कहना है कि इन मुद्दों पर केंद्र सरकार को तुरंत ध्यान देना चाहिए। पार्टी कार्यकर्ता इन समस्याओं को जनता के सामने लाकर राहत की मांग कर रहे हैं। आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से होगा और लोकतांत्रिक तरीके से सरकार तक आवाज पहुंचाई जाएगी।
बिहार कांग्रेस के नेताओं ने सभी पुराने अध्यक्षों, कार्यकर्ताओं, पूर्व सांसदों, विधायकों, पार्षदों और पार्टी के विभिन्न मोर्चों के पदाधिकारियों से सक्रिय सहयोग की अपील की है। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन की सफलता जनता की भागीदारी पर निर्भर करेगी।
जनता की परेशानी क्या है?
एलपीजी की किल्लत से घरेलू रसोई का काम प्रभावित हो रहा है। कई इलाकों में बुकिंग के बावजूद सिलेंडर समय पर नहीं पहुंच रहे हैं। वहीं बिजली दरों में बढ़ोतरी से छोटे व्यापारियों और मध्यम वर्गीय परिवारों का बिल बढ़ गया है। पेट्रोल-डीजल की कीमतें भी अप्रत्यक्ष रूप से कई वस्तुओं के दाम बढ़ा रही हैं।
कांग्रेस का मानना है कि इन मुद्दों पर केंद्र सरकार की नीतियां आम आदमी के हितों के खिलाफ जा रही हैं। पार्टी इन समस्याओं का समाधान चाहती है ताकि लोगों को राहत मिल सके।

आगे क्या?
तीन दिवसीय इस आंदोलन के बाद कांग्रेस आगे की रणनीति तय करेगी। यदि सरकार ने इन मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया तो पार्टी और बड़े स्तर पर विरोध कार्यक्रमों की तैयारी कर सकती है।
इस बीच आम लोगों से अपील की गई है कि वे अपनी समस्याएं स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं या प्रेस वार्ताओं के माध्यम से साझा करें। पार्टी का प्रयास है कि जनता की असली आवाज संसद और सरकार तक पहुंचे।
यह आंदोलन बिहार में राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया है। विपक्षी दल इसे केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने का मौका बता रहे हैं। वहीं सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
कांग्रेस नेताओं ने जोर दिया कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं बल्कि नीतियों के खिलाफ है। उद्देश्य केवल आम आदमी को महंगाई और किल्लत से राहत दिलाना है।
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