वाराणसी: धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी के महामनापुरी कॉलोनी (हैदराबाद गेट) स्थित महालक्ष्मी इण्टरप्राइज के प्रांगण में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के सातवें और मुख्य दिवस पर भक्ति और उल्लास का अनूठा संगम देखने को मिला। पूज्य आचार्य श्री गोविन्द दूबे जी (वृन्दावन धाम) के सानिध्य में पूरा पांडाल तालियों की गड़गड़ाहट और मंगल गीतों से सराबोर रहा। सुदामा चरित्र और रुक्मिणी विवाह के प्रसंग ने श्रद्धालुओं को गहरी भावना से जोड़ दिया।

आचार्य श्री गोविन्द दूबे जी ने रुक्मिणी विवाह के आध्यात्मिक पक्ष पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि रुक्मिणी साक्षात् भक्ति स्वरूपा हैं और भगवान को पाने के लिए अनन्य प्रेम तथा समर्पण अनिवार्य है। जब सुदामा चरित्र का प्रसंग सुनाया गया तो पांडाल में उपस्थित हर श्रद्धालु की आंखें नम हो गईं। मित्रता और निस्वार्थ प्रेम के इस प्रसंग ने सभी को भावविभोर कर दिया। कथा के दौरान भजन-कीर्तन और मंगल गीतों ने माहौल को और भक्तिमय बना दिया।

विशिष्ट अतिथियों का आगमन इस पावन अवसर को और यादगार बना गया। स्वामी परिपूर्णानन्द जी महाराज के साथ बक्सर से पधारे प्रकाश पाण्डेय जी, अभिषेक ओझा जी, अजय पांडेय जी, बब्लू पाण्डेय जी श्रीप्रकाश चंद्र जी, संजय ओझा जी, सरोज जी, आशुतोष जी, अमित जी, चंदन जी और कृष्णा चौबे जी सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने शिरकत की। सभी अतिथियों ने व्यास पीठ का पूजन किया और भगवान के स्वरूपों की आरती उतारकर आशीर्वाद प्राप्त किया।
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मुख्य आयोजक श्री अमित पाण्डेय जी और श्री विजय जी (दुर्गा इन्फ्रासिटी एवं वैभव लक्ष्मी एसोसिएट) के विशेष प्रयासों से आज छप्पन भोग का भव्य आयोजन किया गया। भक्तजनों के बीच प्रसाद वितरण हुआ। विवाह की रस्मों के दौरान श्रद्धालुओं ने ढोल-नगाड़ों की थाप पर जमकर नृत्य किया।

यह कथा बक्सर सहित आसपास के क्षेत्रों के श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखती है। कई बक्सर निवासी परिवार काशी पहुंचकर कथा का लाभ ले रहे हैं। आयोजन स्थल पर सुरक्षा और व्यवस्था को चाक-चौबंद रखा गया था। कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने आचार्य जी के प्रवचनों को ध्यान से सुना और भक्ति भाव से भाग लिया।

काशी में ऐसे धार्मिक आयोजन न केवल आस्था को मजबूत करते हैं बल्कि सामुदायिक एकता भी बढ़ाते हैं। कल के विशाल भंडारे को लेकर आयोजकों ने पूरी तैयारी कर ली है। श्रद्धालु कल सुबह से ही पधारने की योजना बना रहे हैं।
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