अनुपम खेर हर फिल्म की कमाई से महेश भट्ट को देते हैं 25 हजार रुपये, एक्टर ने खुद बताई इस रस्म की असली वजह

Anupam Khere pay money to Mahesh bhatt
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मुंबई, 22 मार्च 2026: बॉलीवुड में रिश्ते अक्सर वक्त के साथ बदल जाते हैं, लेकिन अनुपम खेर और महेश भट्ट की जोड़ी ने वफादारी और सम्मान की एक अनोखी मिसाल पेश की है। हाल ही में एक इंटरव्यू में अनुपम खेर ने खुलासा किया कि वे अपनी हर फिल्म पूरी होने के बाद महेश भट्ट को नकद राशि भेंट करते हैं। आज यह राशि 25,000 रुपये हो चुकी है। अनुपम कहते हैं कि यह कोई औपचारिक लेन-देन नहीं, बल्कि गुरु के प्रति सम्मान और आभार की एक पुरानी रस्म है।

अनुपम खेर ने बताया कि 1984 में महेश भट्ट ने फिल्म ‘सारांश’ के जरिए उन्हें बॉलीवुड में पहला बड़ा ब्रेक दिया था। उसी सम्मान के प्रतीक के रूप में उन्होंने यह परंपरा शुरू की। शुरुआत सिर्फ 250 रुपये से हुई थी। समय के साथ महंगाई बढ़ी, अनुपम की सफलता का ग्राफ ऊंचा चढ़ा और यह राशि धीरे-धीरे 500, 1000, 5000 और अब 25,000 रुपये तक पहुंच गई। अनुपम हंसी-मजाक के अंदाज में कहते हैं कि भट्ट साहब खुद कहते हैं कि महंगाई के हिसाब से इस फीस का बढ़ना लाजमी है।

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अनुपम ने शेयर किया कि आज भी वे महेश भट्ट को लिफाफा देते हैं। हाल ही में पिछले हफ्ते भी उन्होंने भट्ट साहब को एक लिफाफा सौंपा। अनुपम कहते हैं, “अब वह बस लिफाफा पकड़ लेते हैं और बिना देखे ही पता होता है कि इसमें क्या है। यह हमारे बीच की एक खूबसूरत कॉमेडी और परंपरा बन गई है।” यह रस्म अब सिर्फ आर्थिक लेन-देन नहीं, बल्कि गुरु-शिष्य के रिश्ते का भावनात्मक प्रतीक बन चुकी है।

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अनुपम खेर अब अपने गुरु के साथ फिर से स्क्रीन शेयर करने को बेताब हैं। उन्होंने महेश भट्ट से इच्छा जताई है कि यदि ‘सारांश 2’ बनती है तो वे उसमें ‘टेकन’ फिल्म के लीड कैरेक्टर की तरह एक एक्शन हीरो की भूमिका निभाना चाहते हैं। अनुपम अपनी फिटनेस पर काम कर रहे हैं और कहते हैं कि वे रिस्क लेने और पर्दे पर अपना बदला हुआ शरीर दिखाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

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साल 2025 अनुपम खेर के लिए काफी व्यस्त रहा। उन्होंने ‘तन्वी द ग्रेट’, ‘मेट्रो इन दिनों’, ‘इमरजेंसी’ और ‘तुमको मेरी कसम’ जैसी फिल्मों में काम किया। फिलहाल वे तेलुगु फिल्म ‘द इंडियन हाउस’ की शूटिंग में व्यस्त हैं, जहां दर्शकों को उनकी दमदार एक्टिंग फिर से देखने को मिलेगी।

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अनुपम खेर की यह कहानी सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि मेहनत, सम्मान और गुरु-शिष्य परंपरा का जीता-जागता उदाहरण है। बॉलीवुड में जहां कई रिश्ते बदलते वक्त के साथ फीके पड़ जाते हैं, वहां अनुपम और महेश भट्ट की जोड़ी ने वफादारी की मिसाल कायम की है। यह रस्म न सिर्फ दोनों के बीच के रिश्ते को मजबूत बनाती है, बल्कि युवा कलाकारों को भी सिखाती है कि सफलता के बाद भी अपने गुरु का सम्मान करना कितना जरूरी है।

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