बक्सर, 15 दिसंबर 2025: चौसा प्रखंड के चुन्नी स्थित आदर्श संस्कृत उच्च विद्यालय में शनिवार को संस्थापक पंडित रामायण शर्मा की पुण्यतिथि को याद करते हुए भावपूर्ण श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। विद्यालय परिवार ने उनके योगदान को नमन करते हुए कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें छात्रों ने उत्साह से भाग लिया। यह सभा न केवल उनकी स्मृति को ताजा करती है, बल्कि संस्कृत शिक्षा के महत्व को भी रेखांकित करती है। उपस्थित सभी ने पंडित जी के जीवन से प्रेरणा लेने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम की शुरुआत पंडित रामायण शर्मा के चित्र पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि से हुई। अध्यक्षता उप ब्लॉक प्रमुख मोहित दूबे ने की, जबकि संचालन विद्यालय के शिक्षक रविंद्र कुमार मिश्र ने किया। सभा में +2 और माध्यमिक वर्ग के छात्रों के बीच सुलेख, भाषण, निबंध लेखन और खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। छात्र-छात्राओं ने इनमें जोशो-खरोश के साथ हिस्सा लिया। सुलेख में सुंदर लेखन से कई छात्र चमके, भाषण में संस्कृत शिक्षा के महत्व पर विचार व्यक्त किए गए, निबंध में पंडित जी के जीवन पर भावुक रचनाएं लिखी गईं, और खेलों में दौड़-कूद का मजा लूटा। सफल छात्रों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया, जिससे उनके चेहरों पर खुशी की लाली छा गई।
वक्ताओं ने पंडित रामायण शर्मा के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पंडित जी ने संस्कृत शिक्षा के प्रचार-प्रसार में अथक प्रयास किए। उनके द्वारा स्थापित यह विद्यालय आज भी संस्कार, अनुशासन और गुणवत्ता का प्रतीक है। एक वक्ता ने भावुक होकर कहा, “पंडित जी का सपना था कि हर बच्चा संस्कृत के माध्यम से भारतीय संस्कृति से जुड़े। आज उनके विद्यार्थी वही कर रहे हैं।” अध्यक्षीय संबोधन में उप ब्लॉक प्रमुख मोहित दूबे ने कहा कि ऐसे शिक्षाविद् समाज के लिए प्रेरणास्रोत होते हैं। “उनके आदर्शों पर चलकर ही शिक्षा का सच्चा उद्देश्य पूरा होगा। आज के दौर में संस्कृत जैसी भाषा हमें जड़ों से जोड़ती है।” मोहित दूबे ने छात्रों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि मेहनत से वे पंडित जी के सपनों को साकार करें।

कार्यक्रम में विद्यालय के सभी शिक्षक, कर्मचारी, छात्र-छात्राएं और स्थानीय गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। सभा का समापन शांति पाठ के साथ हुआ, जहां सभी ने पंडित रामायण शर्मा की आत्मा की शांति की प्रार्थना की। एक छात्र ने कहा, “पंडित सर की कहानियां सुनकर हमें लगता है कि वे आज भी हमारे साथ हैं।” यह आयोजन न केवल स्मृति को जीवंत करता है, बल्कि छात्रों में प्रतिस्पर्धा की भावना भी जगाता है। चुन्नी जैसे ग्रामीण इलाके में संस्कृत शिक्षा का यह केंद्र बक्सर जिले के लिए गौरव का विषय है। यदि आप संस्कृत सीखने का शौकीन हैं, तो यह विद्यालय एक बेहतरीन विकल्प है। पंडित रामायण शर्मा को नमन!
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