पटना, 6 दिसंबर 2025: भारतीय मूल के रूस में चुने गए पहले जनप्रतिनिधि अभय कुमार सिंह इन दिनों खास चर्चा में हैं। उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान अपील की है कि रूस भारत को अपनी सबसे एडवांस्ड एयर डिफेंस टेक्नोलॉजी S-500 मिसाइल सिस्टम दे। यह अपील भारत-रूस संबंधों को नई मजबूती देने वाली बताई जा रही है। पटना के एक साधारण परिवार से निकले अभय सिंह की यह आवाज न सिर्फ रूस की राजनीति में भारतीय छाप छोड़ रही है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी सुर्खियां बटोर रही है।
कौन हैं अभय कुमार सिंह?
बिहार की राजधानी पटना में जन्मे अभय कुमार सिंह ने अपनी शुरुआती पढ़ाई पटना के लोयोला हाई स्कूल से पूरी की। साल 1991 में वे मेडिकल की पढ़ाई के लिए रूस गए और Kursk State Medical University से MBBS की डिग्री हासिल की। रूस की कड़ाके की सर्दी उनके लिए बड़ी चुनौती साबित हुई। एक इंटरव्यू में उन्होंने खुद बताया था कि तापमान -25 से -30 डिग्री तक गिर जाता था, जिससे घर लौटने का मन बना लिया था। फिर भी हार न मानते हुए उन्होंने पढ़ाई पूरी की। भारत लौटकर डॉक्टर के तौर पर प्रैक्टिस करने की कोशिश की, लेकिन जल्द ही रूस वापस चले गए। वहां की जिंदगी ने उन्हें नई दिशा दी।

डॉक्टर से बिजनेसमैन और फिर नेता की राह
रूस लौटने के बाद अभय सिंह ने मेडिकल क्षेत्र से जुड़ा कारोबार शुरू किया। धीरे-धीरे रियल एस्टेट बिजनेस में भी कदम रखा। आर्थिक रूप से मजबूत होने के बाद उन्होंने राजनीति की ओर रुख किया। वे रूस की सत्तारूढ़ पार्टी United Russia से जुड़े, जो राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की पार्टी मानी जाती है। 2017 में पहली बार कुर्स्क सिटी विधानसभा City Duma का डिप्टी चुने गए। यह पद भारत के किसी राज्य में विधायक (MLA) के बराबर होता है। 2022 में वे फिर से निर्वाचित हुए। इस तरह वे रूस में भारतीय मूल के पहले जनप्रतिनिधि बने। खुद को वे गर्व से ‘बिहार का बेटा’ बताते हैं और कहते हैं कि राजनीति हमारे डीएनए में है।

पुतिन की यात्रा और S-500 की डिमांड
व्लादिमीर पुतिन की चार साल बाद भारत यात्रा से ठीक पहले अभय सिंह ने नई बहस छेड़ दी। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि भारत को रूस से S-500 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम मांगना चाहिए। उनका तर्क है कि S-400 सिस्टम पहले से ही बेहद प्रभावी साबित हो चुका है, भारत ने इसकी ताकत देख ली है। लेकिन S-500 उससे कई कदम आगे है। यह रूस की सबसे एडवांस्ड डिफेंस टेक्नोलॉजी है, जिसे अब तक किसी देश को निर्यात नहीं किया गया – यहां तक कि चीन को भी नहीं। अभय सिंह के मुताबिक, अगर भारत को S-500 मिल जाता है, तो यह भारतीय सुरक्षा क्षमता में जबरदस्त इजाफा करेगा। साथ ही भारत-रूस सैन्य साझेदारी को नई ऊंचाई देगा। पुतिन की इस यात्रा के दौरान कई समझौते होने की उम्मीद है, और अभय सिंह की यह अपील उनमें एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकती है।
सीमा से सटे क्षेत्र का प्रतिनिधित्व
अभय सिंह जिस कुर्स्क क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं, वह यूक्रेन सीमा से सटा हुआ इलाका है। मौजूदा भू-राजनीतिक हालात में यह रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में एक भारतीय मूल के नेता का यहां से चुना जाना रूस में विविधता का प्रतीक है। अभय सिंह ने हमेशा भारत-रूस के सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया है। उनकी यह यात्रा पटना के एक लड़के से रूसी विधायक तक की प्रेरणादायक कहानी है, जो दिखाती है कि मेहनत और हिम्मत से कोई भी सपना हकीकत बन सकता है। बिहार के लोग उन्हें अपने बेटे की तरह देखते हैं, और उनकी अपील से उम्मीदें बढ़ गई हैं कि भारत को जल्द ही नई रक्षा तकनीक मिलेगी।
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